लोड हो रहा है...

भाजपा के हाथरस सांसद राजवीर सिंह दिलेर की हार्ट अटैक से मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. हाथरस संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद राजवीर सिंह दिलेर (66) का 24 अप्रैल की शाम देहांत हो गया। उनकी मृत्यु की वजह हृदयाघात बताई गई है। वह दिल के रोगी थे। शाम को सुरक्षा विहार स्थित घर पर तबीयत बिगड़ने पर परिजन आनन-फानन उन्हें क्वार्सी स्थित ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बता दें कि मौजूदा लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हाथरस से उनका टिकट काटकर प्रदेश सरकार में मंत्री अनूप प्रधान को प्रत्याशी बनाया है।

मूल रूप से गभाना तहसील के गांव दौरऊ निवासी राजवीर सिंह दिलेर का जन्म 1 मई 1958 को हुआ। पिता स्व. किशनलाल दिलेर के दो पुत्र व एक पुत्री में वह दूसरे नंबर के पुत्र थे। उनके बड़े भाई राजेंद्र दिलेर सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हैं और गाजियाबाद रहते हैं। राजवीर दिलेर सारसौल की सुरक्षा विहार कॉलोनी में परिवार सहित रहते थे। घर में पत्नी रजनी दिलेर के अलावा पुत्र दीपक व तीन बेटियां क्रमश: मंजू दिलेर, राधा व पूर्णिमा दिलेर हैं। सभी की शादी हो चुकी है।

पिता की राजनीतिक विरासत संभाली 

पिता किशन लाल दिलेर हाथरस सीट से चार बार भाजपा सांसद रहे हैं। राजवीर ने पिता की राजनीतिक विरासत संभालते हुए भाजपा में ही राजनीति की और सबसे पहले 2000-05 तक जवां ब्लॉक से जिला पंचायत सदस्य रहे। पिता के देहांत के बाद वह हाथरस (सुरक्षित) लोकसभा सीट पर लगातार सक्रिय रहे और कई बार के प्रयास के बाद उन्हें 2017 में भाजपा ने इगलास आरक्षित सीट पर विधानसभा का टिकट दिया। वह रिकार्ड मतों से चुनाव जीते। इसी रिकार्ड जीत का उपहार उन्हें 2019 में पिता की विरासत वाली सीट हाथरस पर लोकसभा के टिकट के रूप में मिला और वह हाथरस से सांसद का चुनाव रिकार्ड मतों से जीते थे। राजवीर दिलेर के देहांत की खबर पर शोक की लहर दौड़ गई। तमाम लोग उनके घर पर जुटने लगे हैं।

साभार : अमर उजाला

- Advertisement -

फेसबुक पेज : https://www.facebook.com/profile.php?id=61558434413602

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।