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दिल्ली की दीवारों पर लिखे गए नक्सलबाड़ी जिंदाबाद सहित कई विवादित नारे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर में भी विवादित नारे लिखे गए हैं। इनमें चुनाव बहिष्कार करने की अपील की गई है। नारे लिखने की जिम्मेदारी भगत सिंह छात्र एकता मंच ने ली है। डीयू प्रशासन ने मॉरिस नगर थाने में शिकायत की है। पुलिस सीसीटीवी कैमरे खंगालकर देखकर सुबूत एकत्र कर रही है।

डीयू के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की दीवारों पर नारे लिखे गए हैं। इनमें चुनाव बहिष्कार करो, नक्सलबाड़ी जिंदाबाद जैसे नारे लिखे गए हैं। नारों के पीछे भगत सिंह छात्र एकता मंच का नाम लिखा गया है। मंच ने इसकी जिम्मेदारी भी ले ली है। मंच की पदाधिकारी और दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म की छात्रा बादल ने कहा, “देश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जा रही है। संसद में सिर्फ एक खास वर्ग की बात की जा रही है। अब देश को जनवादी क्रांति की जरूरत है। हमनें नारे लिखकर लोगों से क्रांति से जुड़ने का आह्वान किया है।”

ABVP ने नारे लिखे जाने की निंदा की

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने नारे लिखे जाने की निंदा की है। मॉरिस नगर थाने में शिकायत कर इस घटना में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई और नारे तत्काल मिटाने की मांग की है। एबीवीपी ने एक बयान में कहा है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब दिल्ली का युवा मतदाता लोकतंत्र के उत्सव में भाग लेने के लिए उत्साहित है, तो इस तरह के अलोकतांत्रिक नारे लिखे गए।

नारे मिटाए जा रहे: प्रो. रजनी अब्बी

एबीवीपी इसका कड़ा विरोध कर कार्रवाई की मांग करती है कि इस पूरे रोड पर लगे सीसीटीवी फुटेज को जांचकर कार्रवाई की जानी चाहिए। डीयू की प्रॉक्टर प्रो. रजनी अब्बी ने कहा है कि नारे मिटाए जा रहे हैं। मारिस नगर थाने में हमारी ओर से शिकायत दी गई है। सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को सहयोग किया जा रहा है।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।