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जापान में 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट जारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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टोक्यो. जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने मंगलवार को शक्तिशाली भूकंप के बाद टोक्यो के दक्षिण में स्थित सुदूर द्वीपों के समूह के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की. हालांकि भूकंप से अब तक किसी तरह के नुकसान या चोट की सूचना नहीं मिली है. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने कहा कि मंगलवार सुबह इज़ू द्वीप के तटीय निवासियों पर 5.9 तीव्रता का भूकंप आया और उसने कुछ ही मिनटों में क्षेत्र में एक मीटर तक की लहरें उठने की चेतावनी जारी की. पिछले महीने दक्षिणी जापान के मियाजाकी प्रान्त में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इस भूकंप में कम से कम 16 लोग घायल हो गए थे. वहीं 50 सेंटीमीटर तक ऊंची सुनामी की छोटी लहरें बनने लगीं, जो लगभग आधे घंटे बाद जापान के तट तक पहुंच गईं थी.

मेगाक्वेक अलर्ट जारी

इस घटना के बाद जापान मेटियोरोलिजकल एजेंसी (JMA) ने पहली बार मेगाक्वेक अलर्ट जारी किया था. जापान में यह पहला मौका है जब इस तरह की एडवाइजरी जारी की गई. इस भूकंप का सेंटर समुद्र तट से दूर और लगभग 25 किलोमीटर अंडरग्राउंड समुद्री गर्त नानकाई ट्रफ के पास था. नानकाई ट्रफ के नीचे एक बड़ा फॉल्ट जोन है.

भूकंप का खतरा बढ़ा

जापान की सरकार के मुताबिक इस तरह के भूकंप से सैकड़ों-हजारों लोग हताहत हो सकते हैं. जेएमए ने मेगाक्वेक अलर्ट जारी करने के साथ एडवाइजरी देते हुए कहा कि सामान्य हालात में आने वाले भूकंप की तुलना में एक बड़े पैमाने पर आने वाले महाभूकंप की संभावना ज्यादा है.

क्या है मेगाक्वेक अलर्ट?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक रिक्टर पैमाने पर 8 से ज्यादा तीव्रता वाले भूकंपों को मेगाक्वेक के रूप में क्लासिफाई किया गया है. इतनी तीव्रता का भूकंप तबाही ला सकता है. ऐसा माना जाता है कि इस तरह का भूकंप हर 100 साल में एक बार आता है, जिसके लिए जापान में मेगाक्वेक अलर्ट जारी किया गया है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।