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एएसआई को संभल में मिली पृथ्वीराज चौहान के समय की बावड़ी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल में सनातन का एक और बड़ा सबूत सामने आया है, जिसे राजा पृथ्वीराज चौहान की सेना का ठिकाना बताया जा रहा है. संभल में कई मंजिला एक बावड़ी मिली है. दावा किया जा रहा है कि ये बावड़ी राजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी का ही एक हिस्सा है. बावड़ी के ऊपर एक विशाल पेड़ है. कहा जा रहा है कि उस समय ऐसी बावड़ी का निर्माण सेनाओं को आराम करने और उन्हें छिपाने के लिए बनाया जाता था.

गौरतलब है कि संभल एक ऐतिहासिक नगरी है, जहां पर इतिहास से जुड़े कई राज हैं. एक तरफ चंदौसी में बावड़ी सामने आई तो अब संभल में कई मंजिला एक बावड़ी नजर आई है. स्थानीय लोगों का दावा है कि 5 मंजिल तक उन्होंने पहले देखा था, लेकिन अब ये 2 मंजिल तक रह गई है. संभल की इस बावड़ी में न्यूज 18 इंडिया की टीम पहुंची तो हम भी हैरान रह गए कि जिस बावड़ी को लेकर सम्भल जिला प्रशासन इन दोनों चंदौसी में रात दिन एक किए हुए है. उसी कड़ी में इस बावड़ी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दावा किया जा रहा है कि यहां पर पृथ्वीराज चौहान के समय में उनकी सैन्य टुकड़ियां आराम करती थीं. सम्भल जिला प्रशासन जल्द ही इस बावड़ी का भी मुआयना कर सकता है.

बावड़ी की दो मंजिल आ रही नजर

जिस जगह यह बावड़ी मिली है वह जामा मस्जिद से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर है. इसमें दो मंजिल अभी नजर आ रही है, जबकि बाकी का हिस्सा जमीन में धंसा हुआ है. दावा किया जा रहा है कि इस बावड़ी का निर्माण सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सेना के ठहरने के लिए बनाया गया था. यह बावड़ी खेतों के बीचों बीच है. जामा मस्जिद के पास मिले इस बावड़ी की भी खुदाई अब जिला प्रशासन करवा सकता है.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।