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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता की न्यायिक हिरासत 31 जुलाई तक बढ़ी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के कविता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए. अदालत ने तीनों की न्यायिक हिरासत 31 जुलाई तक बढ़ा दी है. वहीं सीबीआई वाले मामले में अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 8 अगस्त तक बढ़ाई गई है. बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 12 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेजा था. 17 मई को ईडी की तरफ से सातवीं पूरक चार्जशीट दाखिल की गई थी. आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को आरोपी बनाया गया था. इस मामले में अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जिसमें AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल, पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह बीआरएस नेता के. कविता शामिल हैं. संजय सिंह को जमानत मिल चुकी है.

21 मार्च को हुई थी केजरीवाल की गिरफ्तारी

ईडी की तरफ से 21 मार्च की शाम को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दी थी. लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद केजरीवाल ने 2 जून को वापस सरेंडर कर दिया था. वहीं मनीष सिसोदिया की भी न्यायिक हिरासत 31 जुलाई तक बढ़ा दी गई है. इससे पहले न्यायिक हिरासत की अवधि 22 जुलाई को खत्म हो तब उसे 26 जुलाई तक बढ़ाया गया था. बता दें कि मनीष सिसोदिया को दिल्ली आबकारी नीति मामले में पिछले साल फरवरी में गिरफ्तार किया गया था. 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया. जिसपर कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को नोटिस देते हुए 29 जुलाई तक मामले में जवाब दाखिल करने को कहा था. मनीष सिसोदिया के वकील की तरफ से तर्क देते हुए कहा गया था. कि वे 16 महीने से जेल में है लेकिन केस अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया है.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।