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संभल सांप्रदायिक हिंसा मामले में सपा सांसद बर्क और स्थानीय विधायक के बेटे पर एफआईआर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान रविवार को भड़की हिंसा में 4 युवकों की मौत हो गई। सीओ अनुज चौधरी और एसपी के PRO के पैर में गोली लगी। एसपी समेत 22 अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हिंसा के आरोप में पुलिस ने 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और संभल के विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल पर हिंसा भड़काने की एफआईआर दर्ज की है। अब तक 7 FIR हुई है।

सभी मृतकों को देर रात ही सुपुर्दे खाक कर दिया गया। हिंसा के बाद 24 घंटे के लिए संभल तहसील में इंटरनेट बंद कर दिया गया। सभी स्कूल आज बंद रहेंगे। डीएम राजेंद्र पैंसिया ने एक दिसंबर तक संभल जिले में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। पूरे शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा, ‘आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई होगी। रासुका लगाया जाएगा’ इधर, मृतकों के परिजनों का दावा है कि पुलिस की गोली से मौत हुई है। हालांकि कमिश्नर ने कहा, ‘पुलिस फायरिंग में कोई मौत नहीं है। हमलावरों की फायरिंग में युवकों की जान गई है।’

सर्वे के दौरान भड़की हिंसा, अचानक तीन हजार की भीड़ जमा रविवार सुबह 6:30 बजे डीएम-एसपी के साथ एक टीम जामा मस्जिद का सर्वे करने पहुंची थी। टीम को देखकर मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क गए। कुछ ही देर में करीब दो से तीन हजार लोग जामा मस्जिद के बाहर पहुंच गए। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। इसके बाद भगदड़ जैसे हालात हो गए। छतों से भी पथराव शुरू हो गया, पुलिस को भागना पड़ा। बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे, फिर लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ा।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।