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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नहीं मिली ज्ञानवापी की परिक्रमा की अनुमति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. ज्ञानवापी को लेकर एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद ज्योतिष मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिक्रमा का ऐलान किया है. उनके इस ऐलान के बाद से सोमवार को पुलिस ने उनके मठ का घेराव किया है और उन्हें बाहर नहीं आने दिया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारी संख्या में पुलिस बल और लोगों की भीड़ मठ के के बाहर इकट्ठा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिक्रमा के लिए कोई भी अनुमति नहीं ली थी जिसके कारण उन्हें रोका गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पुलिस ने धारा 144 का हवाला देकर उन्हें मठ से बाहर ही निकलने नहीं दिया.

क्या बोले शंकराचार्य

शंकराचार्य ने कहा कि एएसआई रिपोर्ट आने के बाद ये साफ हो चुका है कि वहां मस्जिद नहीं बल्कि एक पुरातन हिंदू मंदिर है. ऐसे में वहां पूजा पाठ करने में क्या हर्ज है. बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पहले ही ज्ञानवापी के परिक्रमा का ऐलान किया था. जिसके मद्देनजर सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती उनके मठ के बाहर की गई थी. इसके अलावा गोदौलिया और काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर भी कड़े सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे.

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर ASI की रिपोर्ट सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जीपीआर सर्वे पर ASI ने कहा है कि यहां पर एक बड़ा भव्य हिन्दू मंदिर था और ढांचे यानी मस्जिद के पहले एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था. ASI की सर्वे रिपोर्ट में मंदिर होने के 32 से ज्यादा प्रमाण मिलने की बात कही गई है.

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साभार : जी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।