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अरविंद केजरीवाल को जाना होगा जेल, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की याचिका स्वीकार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत 7 दिन बढ़ाने की याचिका लेने से मना कर दिया है। अब उन्हें 2 जून को तिहाड़ जेल वापस जाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केजरीवाल को नियमित जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट जाने की छूट दी गई है, इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जा रही है।

केजरीवाल को 10 मई को जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की अदालत से अंतरिम जमानत मिली थी। उन्हें 2 जून को तिहाड़ जेल में सरेंडर करने को कहा गया था।

लोकल कोर्ट में ED की सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर सुनवाई 4 जून को
दिल्ली की लोकल कोर्ट ने 28 मई को केजरीवाल के खिलाफ ED की सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने के अपने आदेश को 4 जून तक सुरक्षित रख लिया है। ED ने 17 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट में 18वीं सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें केजरीवाल और AAP को आरोपी बनाया था।

AAP ने कहा था- केजरीवाल का कीटोन लेवल कम हुआ, ये गंभीर बीमारी का संकेत
आम आदमी पार्टी ने सोमवार को दलील दी थी कि गिरफ्तारी के बाद केजरीवाल का वजन 7 किलो कम हो गया है और उनका कीटोन लेवल हाई है, जो किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

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AAP ने यह भी कहा था कि डॉक्टरों ने केजरीवाल को पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी और कंप्यूटेड टोमोग्राफी (PET-CT) स्कैन और कुछ दूसरे मेडिकल टेस्ट कराने की सलाह दी थी, जिसके कारण उन्होंने अपनी अंतरिम जमानत बढ़ाने की मांग की है। जेल में रहते हुए उनका शुगर लेवल भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ था। केजरीवाल और उनकी पार्टी ने यह दावा भी किया था कि उन्हें इंसुलिन नहीं दी जा रही है।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।