लोड हो रहा है...

नेपाल में बाढ़ से 125 मरे व 64 लोग लापता, बढ़ सकती है संख्या

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

काठमांडू. पुलिस ने बताया कि नेपाल में बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या रविवार को 125 हो गई। शुक्रवार से पूर्वी और मध्य नेपाल के बड़े हिस्से जलमग्न हैं, देश के कई हिस्सों में अचानक बाढ़ ने कहर बरपा रखा है। सशस्त्र पुलिस बल के सूत्रों के अनुसार, बाढ़, भूस्खलन और बाढ़ में 64 लोग लापता हैं, जबकि 61 लोग घायल हुए हैं। काठमांडू घाटी में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। इस भीषण बाढ़ में कम से कम 322 घर और 16 पुल क्षतिग्रस्त हो गए है। सशस्त्र पुलिस बल के सूत्रों ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने करीब 3,626 लोगों को बचाया है। सूत्रों ने बताया कि बचाव अभियान अभी भी जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने 40-45 सालों में काठमांडू घाटी में ऐसी विनाशकारी बाढ़ कभी नहीं देखी। सशस्त्र पुलिस बल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, इस विनाशाकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या 125 हो गई है।

काठमांडू की सीमा से लगे धाडिंग जिले में भूस्खलन में एक बस के दब जाने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई। भक्तपुर शहर में भूस्खलन के कारण एक घर ढह जाने से पांच लोगों की मौत हो गई। मकवानपुर में ऑल नेपाल फुटबॉल एसोसिएशन द्वारा संचालित एक प्रशिक्षण केंद्र भूस्खलन की चपेट में आ गया। जिसमें छह फुटबॉल खिलाड़ी भी मारे गए। अन्य लोग बाढ़ के पानी में बह गए। नेपाल पुलिस के उप-प्रवक्ता बिश्वो अधिकारी ने कहा कि भारी बारिश के कारण हिमालय क्षेत्र में 66 लोगों ने अपनी जान गंवाई। काठमांडू घाटी में 34 लोगों की मौत हो गी। बाढ़ के कारण 60 लोग घायल हो गए। देशभर में 79 लोग अभी भी लापता हैं। तीन हजार लोगों को बचाया भी जा चुका है। बिश्वो अधिकारी ने बताया कि 63 इलाकों के मुख्य राजमार्ग अवरुद्ध कर दिए गए हैं। कार्यवाहक प्रधानमंत्री और शहरी विकास मंत्री प्रकाश मान सिंह ने आपातकालीन बैठक बुलाई।

नेपाल सरकार ने अगले तीन दिनों के लिए स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए। भारी बारिश और बाढ़ के कारण काठमांडू में बिजली कटौती के कारण लोग अंधेरे में रहने के लिए मजबूर हैं। पुलिस ने बताया कि काठमांडू में  226 घर जलमग्न हो गए। प्रभावित इलाकों में 3000 बचाव कर्मियों को भेजा गया है।

साभार : अमर उजाला

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।