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उत्तर प्रदेश में दीपावली पर घोषित हुआ 2 दिन का अवकाश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. दिवाली की तारीख को लेकर बनी उहापोह की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने दिवाली की छुट्टी दो दिन कर दी है. इसमें 31 की छुट्टी तो पहले से ही राजपत्रित अवकाश के रूप में दर्ज है, लेकिन 1 नवंबर की छुट्टी को 9 नवंबर के सेकंड सैटरडे वाले अवकाश से समायोजित किया गया है. इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार में अपर मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार ने निगोशिएबुल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत आदेश जारी कर दिया है.

अपने आदेश में अपर सचिव ने कहा कि प्रदेश में दिवाली पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार की दिवाली कुछ कंफ्यूजन की वजह से दो दिन 31 अक्टूबर और एक नवंबर को पड़ गई है. ऐसे में 9 नवंबर को सेकंड सैटरडे वाले अवकाश का समायोजन एक नवंबर की छुट्टी के साथ किया जा रहा है. अपर सचिव ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि नौ नवंबर यानी सेकेंड सैटरडे को कोई छुट्टी नहीं होगी.

दिवाली की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति

उस दिन सभी शासकीय कार्यालय सामान्य दिनों की तरह संचालित होंगे. बता दें कि सनातन परंपरा में पांच दिन का यह दिवाली पर्व धन तेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है. हालांकि इस बार कुछ पंचांग विक्रेताओं और विद्वानों ने ग्रह नक्षत्रों के खेल में लोगों को उलझा दिया है. इसमें मुख्य रूप से दिवाली पूजन को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है. इसकी वजह से कहीं दिवाली का त्योहार 31 अक्टूबर को मनाया जा रहा है तो कई जगह एक नवंबर को भी त्योहार मनाने की तैयारी है.

नौ नवंबर सेकंड सैटरडे के अवकाश से समायोजन

चूंकि दिवाली की छुट्टी आम तौर पर एक दिन की ही होती है, ऐसे में एक नवंबर को दिवाली मनाने वालों के सामने समस्या पैदा हो गई थी कि वह कैसे जरूरी इंतजाम करेंगे. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने समाधान देने की कोशिश की है. इसमें नौ नवंबर को सेकंड सैटरडे वाले अवकाश को एक नवंबर के अवकाश में समायोजित किया गया है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।