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विधायक टी राजा सिंह ने तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने पर भाजपा से दिया इस्तीफा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

हैदराबाद. तेलंगाना में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. गोशामहल के विधायक टी राजा सिंह ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि टी राजा सिंह तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाहते थे. उन्होंने अपना इस्तीफा तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को भेज दिया है. टी राजा सिंह ने सदमे और निराशा का हवाला देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है. उन्होंने तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को लिखे अपने इस्तीफे में कहा, मैं बहुत ही निराशा के साथ यह पत्र लिखा हूं. तमाम मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि रामचंदर राव को तेलंगाना बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष हो सकते हैं. यह फैसला मेरे लिए काफी शॉकिंग था. न सिर्फ मेरे लिए बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं के लिए जो पूरी आस्था से मेरे साथ खड़े थे. मगर वो आज निराश महसूस कर रहे हैं.

गोशामहल के लोगों की सेवा करते रहेंगे- टी राजा

विवादास्पद बयानों और हिंदुत्व के प्रति अपनी कट्टर छवि के लिए मशहूर राजा सिंह के इस्तीफे का कारण तेलंगाना बीजेपी में नेतृत्व विवाद बताया जा रहा है. टी राजा सिंह तेलंगाना में गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे. रामचंदर राव के तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष बनने की संभावन को लेकर उनकी नाराजगी है. इस्तीफे के बाद टी राजा ने कहा कि भले ही वे पार्टी से अलग हो गए हों लेकिन हिंदुत्व और गोशामहल के लोगों की सेवा करते रहेंगे. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि अब में बीजेपी की सदस्य नहीं हूं. मैं पार्टी से अलग हो सकता हूं, लेकिन हिंदुत्व की विचारधारा और गोशामहल के लोगों की सेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं.

2018 में भी टी राजा सिंह ने दिया था इस्तीफा

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब राजा सिंह ने बीजेपी से इस्तीफा दिया हो. इससे पहले 2018 में उन्होंने गौ रक्षा के मुद्दे पर पार्टी से समर्थन न मिलने का हवाला देकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन तब पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था. टाइगर नाम से मशहूर टी राजा सिंह के इस कदम से तेलंगाना बीजेपी में उथल-पुथल मच सकती है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।