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एयर मार्शल संजीव घुरटिया एवीएसएम वीएसएम ने एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस का कार्यभार संभाला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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एयर मार्शल संजीव घुरटिया एवीएसएम वीएसएम ने 01 सितंबर, 2025 को वायु सेना मुख्यालय में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस का कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालने के बाद एयर मार्शल ने उन सशस्त्र बलों के जवानों के सम्मान में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।

एयर मार्शल संजीव घुराटिया एवीएसएम वीएसएम ने वायुसेना की एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग शाखा में सितंबर 1988 में कमीशन प्राप्त किया था। वे प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, एयर फ़ोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, बेंगलुरु और एयर फ़ोर्स टेक्निकल कॉलेज, बेंगलुरु के पूर्व छात्र हैं। एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के रूप में वे जीईसी, जबलपुर, बिट्स पिलानी और मद्रास विश्वविद्यालय के भी पूर्व छात्र हैं और उन्होंने भोपाल विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। वे रॉयल एयरोनॉटिकल सोसाइटी, लंदन, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया और इंस्टीट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के फेलो हैं। वे आईएसओ 45,000 (ओएच एंड एसएमएस) के लीड ऑडिटर और सोसाइटी ऑफ़ फ़्लाइट टेस्ट इंजीनियर्स, अमरीका के एसोसिएट सदस्य हैं।

वायु सेना अधिकारी ने अपने 37 वर्षों के शानदार करियर में वायुसेना और विदेश में संयुक्त राष्ट्र मिशन में कई महत्‍वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया है। एयर ऑफिसर-इन-चार्ज मेंटेनेंस का कार्यभार संभालने से पहले वे मुख्यालय एमसी में वरिष्ठ मेंटेनेंस स्टाफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे।

उनकी विशिष्ट सेवा के लिए वायु सेना अधिकारी को राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2016 में ‘विशिष्ट सेवा पदक’ और 2025 में ‘अति विशिष्ट सेवा पदक’ से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र मिशन कांगो में सेवा करते हुए उन्हें संयुक्त राष्ट्र के फोर्स कमांडर द्वारा भी प्रशंसा मिली।

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वायु सेना अधिकारी का विवाह श्रीमती अर्चना से हुआ है और दम्पति की दो बेटियां हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।