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मोहसिन नकवी अभी भी खुद ट्रॉफी देने की मांग पर अड़े

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. एशिया कप 2025 के फाइनल में भारत की शानदार जीत के बाद ट्रॉफी और मेडल्स को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) ने मंगलवार को दुबई में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया. वहीं, काउंसिल ने समस्या का हल पांच टेस्ट खेलने वाले देशों के बोर्डों यानी भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के हाथों में सौंप दिया है.

मोहसिन नकवी ने रखी बड़ी डिमांड

कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि मोहसिन नकवी ने साफ कहा है कि अगर भारत एशिया कप ट्रॉफी चाहता है, तो भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव को एसीसी के ऑफिस में आना होगा और उनसे ही ट्रॉफी लेनी होगी. यानी मोहसिन नकवी अभी तक खुद ट्रॉफी देने को लिए अड़े हुए हैं. हालांकि, ऐसा होना ना के बराबर नजर आ रहा है.

अभी भी खत्म नहीं हुआ ट्रॉफी विवाद

दरअसल, विवाद की जड़ दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में फाइनल मैच के बाद की घटना है. भारत ने शानदार प्रदर्शन कर एशिया कप का खिताब जीता था, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चीफ मोहसिन नकवी से ट्रॉफी और मेडल स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद नकवी ने खुद ट्रॉफी को ले लिया, जिसके चलते टीम इंडिया को बिना ट्रॉफी के जश्न मनाना पड़ा. इस घटना ने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया और दोनों देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाई दे दी.

ऐसे में अब एसीसी की बैठक मोहसिन नकवी की अध्यक्षता में हुई, जिसमें बीसीसीआई की ओर से राजीव शुक्ला और आशीष शेलार वर्चुअल रूप से शामिल हुए. बैठक में ट्रॉफी विवाद के अलावा बाकी एजेंडा जैसे उपाध्यक्ष का चुनाव और उभरते खिलाड़ियों और अंडर-19 टूर्नामेंटों के शेड्यूल को आखिरी रूप देने पर भी चर्चा नहीं हो सकी. वहीं, एसीसी ने बीसीसीआई, पीसीबी, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी), श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) को एक औपचारिक ऑफलाइन बैठक आयोजित करने का आदेश दिया है, ताकि जल्द से जल्द ट्रॉफी विवाद का रास्ता निकाला जा सके.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।