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रोहित शर्मा सिडनी टेस्ट से हो सकते हैं बाहर, गौतम गंभीर ने नहीं किया स्पष्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. किसी भी टेस्ट टीम की प्लेइंग-11 की शुरुआत कप्तान से होती है। फिर बाकी खिलाड़ी चुने जाते हैं। सिडनी टेस्ट से पहले भारतीय टीम की स्थिति इससे उलट है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 जनवरी से शुरू होने वाले इस मुकाबले में टीम इंडिया का पहला नाम ही तय नहीं है। गुरुवार को भारतीय कोच गौतम गंभीर से रोहित शर्मा के सिडनी टेस्ट खेलने पर सवाल किया गया था, लेकिन गंभीर ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने बस इतना कहा- ‘प्लेइंग-11 पिच को देखने के बाद तय की जाएगी।’ गंभीर के जवाब के अलावा इस बात के संकेत टीम इंडिया के ट्रेनिंग सेशन में साफ देखने को मिले। फिलहाल, भारतीय टीम बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 1-2 से पिछड़ रही है। टीम को 3 जनवरी से सिडनी में 5 मैचों की सीरीज का आखिरी मुकाबला खेलना है।

3 पॉइंट; जो रोहित के नहीं खेलने के संकेत दे रहे हैं…

1. ड्रेसिंग रूम में अकेले बैठे रहे रोहित मैच से पहले टीम के ट्रेनिंग सेशन में रोहित शर्मा टीम से अलग-थलग दिखे। वे ड्रेसिंग रूम में अकेले बैठे रहे। उन्हें बुमराह से काफी देर तक बातचीत करते देखा गया। रोहित प्रैक्टिस में काफी देरी से आए।

2. बुमराह से बात करते दिखे गंभीर-अगरकर ट्रेनिंग में हेड कोच गौतम गंभीर और अजित अगरकर जसप्रीत बुमराह से बात करते नजर आए। इसके बाद बुमराह ने शुभमन गिल से नेट्स करने के लिए कहा। इस दौरान रोहित शर्मा भी नेट्स करते रहे।

3. रोहित की जगह गिल ने स्लिप में फील्डिंग की ट्रेनिंग की रोहित शर्मा की जगह शुभमन गिल ने स्लिप में फील्डिंग की प्रैक्टिस की। आमतौर पर मुकाबलों के दौरान रोहित शर्मा को यशस्वी और विराट के साथ स्लिप में फील्डिंग करते देखा जाता है।

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साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।