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अगर देश को मिटाना है तो जातिवाद की चर्चा करो : पंडित धीरेंद्र शास्त्री

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के इटावा में एक कथावाचक के साथ इसलिए अभद्र व्यवहार किया गया, क्योंकि उसपर अपनी पहचान छुपाने का आरोप था. अभद्रता की हद तब पार हो गई जब कथावाचक की पब्लिक में सरेआम चोटी काट दी गई और इसका वीडियो बनाकर वायरल किया गया. यह घटना कथित तौर पर जातिवाद को दर्शाती है, क्योंकि पीड़ित कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत कुमार यादव से पहले उनकी जाति पूछी गई और फिर अमानवीयता का परिचय दिया गया. इसपर अब बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नाराजगी जाहिर की है.

‘देश को मिटाना है तो जातिवाद की बात करो’- धीरेंद्र शास्त्री

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हमारी किसी से लड़ाई नहीं है, किसी से प्रेम नहीं है. अगर देश को मिटाना है तो जातिवाद की चर्चा करो. अगर देश को बनाना है तो जातिवाद मिटाने पर चर्चा करो.”

‘इटावा विवाद सहज तरीके से सुलझाया जाए’- धीरेंद्र शास्त्री

इसी के साथ बाबा बागेश्वर ने आगे कहा, “इटावा की घटना पर दोनों पक्षों से प्रार्थना करना चाहता हैं कि कृपा करके देश को बचाना हो तो इस विवाद को बहुत सहज तरीके से सुलझाने की आवश्यकता है. देश को बड़ा बनाने के लिए जातपात से ऊपर उठना चाहिए.”

‘हिंदू-हिंदू ही आपस में लड़ जाएगा’

परमात्मा के लिए हम सभी में सम्मान है. इटावा की घटना बहुत निंदनीय हुई है. हमारी प्रार्थना है कि जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद के लिए काम करें. अगर ये विवाद आज नहीं थमेगा तो हिंदू-हिंदू ही आपस में लड़ जाएगा. मुसलमानों और ईसाइयों की जरूरत नहीं है.” भगवान की कथा करने का विचार किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह सबका अधिकारी है. इसमें कोई दोषी नहीं हो सकता. गुरुनानक देव हों, मीराबाई हों, रैदास हों या कबीरदास… सबने ही भगवान राम और श्याम का गुणगान किया है. इसमें कभी कुछ गलत नहीं था, न अब होना चाहिए.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।