सोमवार, सितंबर 21 2026 | 05:52:02 AM

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने छोड़ा एनडीए का साथ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई. भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तमिलनाडु इकाई के प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने शुक्रवार (1 अगस्त, 2025) को दावा किया कि उन्हें इस बात की सटीक जानकारी नहीं है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से नाता क्यों तोड़ लिया. भाजपा नीत गठबंधन से नाता तोड़ने की पनीरसेल्वम की ओर से गुरुवार (31 जुलाई) को की गई घोषणा को अधिक तवज्जो नहीं देते हुए नागेंद्रन ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने ऐसा निर्णय क्यों लिया है.

अगर पीएम से मिलना चाहते थे तो इंतजाम करा देता- नागेंद्रन

नागेंद्रन ने मदुरै में पत्रकारों से कहा, “अगर इसका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नहीं मिल पाने से कोई लेना-देना होता, तो वह मुलाकात कराने को तैयार थे. अगर पनीरसेल्वम मुझसे अनुरोध करते, तो मैं मुलाकात का इंतजाम करा देता.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम विधानसभा सत्र के दौरान और यहां तक कि फोन पर भी संपर्क में थे. मुझे नहीं पता कि उनकी कोई निजी समस्या है या कोई अन्य मुद्दा है. घोषणा से पहले मैंने उनसे फोन पर बात की थी और यहां तक कि उनसे और टीटीवी दिनाकरन (एक अन्य सहयोगी) से अनुरोध किया था कि वे कोई कठोर निर्णय न लें.’’

यह पूछे जाने पर कि पनीरसेल्वम ने इस बात पर खेद जताया है कि 27 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु दौरे के दौरान वह उनसे नहीं मिल पाए, तो नागेंद्रन ने कहा, ‘‘मुझे इसकी जानकारी नहीं है. अगर मुझे उस समय बताया गया होता, तो मैं उनकी मुलाकात की व्यवस्था कर देता.’’ उन्होंने इससे इनकार किया कि पनीरसेल्वम ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव ईके. पलानीस्वामी के भाजपा पर दबाव के कारण गठबंधन से नाता तोड़ा.

सीएम स्टालिन और पनीरसेल्वम की मुलाकात पर बोले नागेंद्रन

नागेंद्रन ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि उन्होंने (पनीरसेल्वम) मुख्यमंत्री (स्टालिन) से क्यों मुलाकात की. हो सकता है कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए या निजी कारणों से मुलाकात की हो. कोई भी मुख्यमंत्री से मिल सकता है, अगर मुझे आवश्यकता होगी तो मैं भी उनसे मिल सकता हूं.’’

- Advertisement -

साभार : एबीपी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।