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भारत और थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री-XIV मेघालय में प्रारंभ हुआ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारत और थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री-XIV का 14वां संस्करण आज से मेघालय के उमरोई स्थित जॉइंट ट्रेनिंग नोड (जेटीएन) में एक भव्य उद्घाटन समारोह के साथ प्रारंभ हुआ। इस अभ्यास का आयोजन 1 से 14 सितंबर, 2025 तक किया जा रहा है। यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों देशों के बीच चल रहे सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और रॉयल थाई सेना के बीच सहयोग, संयुक्त सहभागिता और आपसी समझ को विस्तार देना है। इससे पहले इस अभ्यास का 13वां संस्करण थाईलैंड के टाक प्रांत के फोर्ट वाचिराप्राकन में आयोजित किया गया।

भारतीय सेना की टुकड़ी में 120 सैन्य कर्मी शामिल हैं, जिसका प्रतिनिधित्व मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन कर रही है। वहीं, रॉयल थाई आर्मी की 53 कर्मियों वाली टुकड़ी का प्रतिनिधित्व प्रथम इन्फैंट्री बटालियन, 14वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड द्वारा किया जा रहा है।

दोनों देशों के बीच होने वाला यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के अंतर्गत अर्ध-शहरी इलाकों में कंपनी स्तर के आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित होगा। दो सप्ताह के इस आयोजन में सामरिक अभ्यास, संयुक्त कार्य योजना, विशेष हथियार कौशल, शारीरिक क्षमता निर्माण और छापामार कार्रवाई शामिल हैं। यह अभ्यास 48 घंटे के प्रमाणीकरण अभ्यास के साथ समाप्त होगा, जिसमें यथार्थवादी परिचालन परिदृश्यों का अनुकरण किया जाएगा।

अभ्यास मैत्री भारत व थाईलैंड के बीच वर्ष 2006 में शुरू किया गया था और यह महत्वपूर्ण संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों में से एक है। वर्तमान संस्करण द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को पहले से अधिक सशक्त करता है और यह क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा के प्रति दोनों सेनाओं की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।