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मोहसिन नकवी से पीसीबी या राजनीतिक पद किसी एक को छोड़ें : शाहिद अफरीदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. एशिया कप 2025 का समापन हो चुका है, इस बार का एशिया कप काफी विवादों से भरा रहा. फाइनल मुकाबला 28 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला गया था, जहां टीम इंडिया ने पाकिस्तान को हराकर खिताब पर कब्जा किया था, लेकिन जीतने के बाद भी टीम इंडिया को ट्रॉफी नहीं मिली थी. दरअसल टीम इंडिया ने एसीसी प्रमुख मोहसिन नकवी के साथ से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद मोहसिन नकवी ट्रॉफी और टीम इंडिया के मेडल लेकर भाग गए थे. जिसपर बीसीसीआई ने एसीसी की मीटिंग में भी आपत्ति जताई थी. वहीं अब पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने मोहसिन नकवी से पीसीबी या राजनीतिक पद छोड़ने की मांग की है.

शाहिद अफरीदी ने उठाई बड़ी मांग

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी का कहना है कि “नकवी साहब से मेरा अनुरोध या सलाह यही है कि ये दोनों बहुत महत्वपूर्ण पद हैं, और ये बड़े काम हैं जिनमें समय लगता है। पीसीबी गृह मंत्रालय से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे अलग ही रखा जाना चाहिए। यह एक बड़ा फैसला होगा और इसे जल्द से जल्द लिया जाना चाहिए। पाकिस्तान क्रिकेट को विशेष ध्यान और समय की आवश्यकता है और नकवी पूरी तरह से सलाहकारों पर निर्भर नहीं रह सकते।”

नकवी को नहीं क्रिकेट का ज्ञान

आगे शाहिद अफरीदी ने कहा कि “नकवी साहब का खुद कहना है कि उनको क्रिकेट के बारें ज्यादा ज्ञान नहीं है, जिसके चलते उनको पीसीबी में अच्छे क्रिकेट सलाहकारों को नियुक्त करने की जरूरत है. और ये सलाहकार उनको या पीसीबी को कहीं नहीं ले जा रहे हैं.”

ACC मीटिंग में नकवी को पड़ी फटकार

एशिया कप 2025 की ट्रॉफी टीम इंडिया को लौटाने को लेकर एक मीटिंग हुई. इस मीटिंग में जमकर बवाल देखने को मिला. मीटिंग में बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने मोहसिन नकवी से एशिया कप की ट्रॉफी और टीम इंडिया के मेडल लौटाने की मांग की, लेकिन नकवी ने ट्रॉफी और मेडल लौटाने के लिए एकबार भी हामी नहीं भरी. जिसके बाद अब बीसीसीआई नवंबर में आईसीसी के साथ होने वाली बैठक में मोहसिन नकवी की शिकायत करने वाला है.

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साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।