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डॉलर के मुकाबले पहली बार रूपया गिरकर 87 रुपये तक फिसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक गिरावट दिखाई है और ये पहली बार 87 रुपये के ऊपर चला चला गया है. करेंसी बाजार की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे की गिरावट के साथ 87.06 के लेवल पर खुला था जबकि कारोबार शरू होने के 10 मिनट के भीतर ये 55 पैसे तक गिर गया है. एक डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जोरदार गिरावट के चलते ये 87.12 रुपये प्रति डॉलर तक फिसल गया था.

क्यों आ रही रुपये में गिरावट

रुपये की गिरावट के पीछे आज डॉलर की मजबूती का कारण ज्यादा असरदार है और इसके चलते डॉलर के सामने कारोबार करने वाली करेंसीज पर असर देखा जाता है. अमेरिका की ओर से जो टैरिफ लगाए गए हैं उससे डॉलर को लेकर आकर्षण बढ़ जाता है. इसके विरुद्ध काम करने वाली सभी करेंसी में गिरावट देखी जाती है और आज ऐसा ही हुआ है. खासतौर से विकासशील देशों में भारत की करेंसी रुपये के लिए अमेरिका से आ रहे संकेत कमजोरी लाने का काम करते हैं.

87.16 रुपये प्रति डॉलर तक गिरी भारतीय करेंसी

रुपया शुरुआती कारोबार में 54 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर 87.16 पर आ गया और शुरुआती कारोबार में रुपया लगातार नीचे आ रहे हैं. रुपये की गिरावट के चलते भारतीय आईटी कंपनियों पर असर देखा जाता है और इनमें देखा जाए तो विप्रो के शेयरों को फायदा मिलता दिख रहा है. आईटी कंपनियों को डॉलर में रेवेन्यू मिलता है तो डॉलर की मजबूती का असर देश की आईटी कंपनियों को मिल सकता है.

शेयर बाजार की भी आज खराब शुरुआत

शेयर बाजार के लिए भी आज का दिन खराब शुरुआत वाला रहा है और इसमें सेंसेक्स-निफ्टी बड़ी गिरावट पर खुले हैं. बीएसई का सेंसेक्स 442.02 अंक या 0.57 फीसदी की गिरावट के साथ 77,063 के लेवल पर खुला है. इसके अलावा एनएसई के निफ्टी ने 162.80 अंक या 0.69 फीसदी की गिरावट के साथ 23,319 के लेवल पर कारोबार की शुरुआत दिखाई है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।