लोड हो रहा है...

मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश के नोटों पर मुजीबुर रहमान की जगह होगी हिंदू मंदिरों की तस्वीरें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ढाका. बांग्लादेश ने रविवार 1 जून 2025 से नए बैंक नोट जारी करने शुरू कर दिए हैं. इन नोटों में खास बात ये है कि इसमें बांग्लादेश के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान की फोटो नहीं होगी बल्कि इसकी जगह बौद्ध और हिंदू मंदिरों की तस्वीरों को छापा गया है. बता दें कि शेख मुजीबुर रहमान शेख हसीना के पिता हैं, जिन्हें पिछले साल तख्तापलट के कारण बांग्लादेश और अपना पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी.

बांग्लादेशी करेंसी से हटी शेख मुजीबुर रहमान की फोटो

बांग्लादेश बैंक प्रवक्ता आरिफ हुसैन खान ने न्यूज एजेंसी ‘AAFP’ से बात करते हुए कहा,’  नई करेंसी बांग्लादेश के प्राकृतिक परिदृश्य और ऐतिहासिक स्थलों को दिखाने पर ज्यादा केंद्रित होगी. उन्होंने कहा कि नई सीरीज और डिजाइन के तहत बांग्लादेशी नोटों में किसी भी इंसान की तस्वीर नहीं होगी.’AAFP’की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी नोटों में बौद्ध और हिंदू मंदिरों के साथ जैनुल आबेदीन की कलाकृति और राष्ट्रीय शहीद स्मारक की फोटो छपी होंगी. ये तस्वीरें साल 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देती हैं. खान ने आगे कहा, ‘नए नोट सेंट्ल बैंक के हेडक्वार्टर से जारी किए जाएंगे. बाद में देशभर में इसके अन्य ऑफिस से भी जारी किए जाएंगे. नए डिजाइन वाले अलग-अलग कीमत के नोट चरणों में जारी किए जाएंगे.’

पहले भी हुआ है बदलाव

बता दें कि इससे पहले भी बांग्लादेश ने बदलती राजनीति को ध्यान में रखते हुए अपने करेंसी में बदलाव किया था. साल 1972 में बांग्लादेश की ओर से अपना नाम पूर्वी पाकिस्तान से बदलकर जारी की गई शुरुआती करेंसी में एक मैप था. बाद में वहां के नोटों पर शेख मुजीबुर रहमान की फोटो दिखने लगी. शेख हसीना के कार्यकाल तक नोटों में हमेशा उनकी ही तस्वीर रही.

शेख हसीना का तख्तापलट

बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से जाने के बावजूद वहां हिंसा खत्म होने का नहीं ले रही है. आए दिन वहां हिंदुओं को टारगेट किया जाता है और वहां के मंदिरों को तोड़ा जाता है. शेख हसीना को मजबूरन बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी. उसके बाद नोबेल पुरस्कार मोहम्मद युनूस वहां की अंतरिम सरकार के मुखिया बने हैं. अब उनकी कुर्सी भी खतरे में है.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।