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पाकिस्तान ईरान से बढ़ा रहा है द्विपक्षीय व्यापार, फिर भी ट्रंप ने लगाया कम टैरिफ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्लामाबाद. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पश्चिमी तनाव के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए शनिवार को दो दिनों की आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान के लाहौर पहुंचे हैं. पाकिस्तान के विदेश विभाग के मुताबिक पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और संघीय आवास मंत्री रईज हुसैन पीरजादा ने पेजेशकियन का लाहौर पहुंचने पर स्वागत किया.

शनिवार सुबह पाकिस्तान रवाना होने से पहले एक ब्रीफिंग के दौरान, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच मौजूदा मजबूत व्यापारिक संबंधों पर जोर दिया और अपनी यात्रा के दौरान इन संबंधों को और मज़बूत करने की आशा जाहिर की है. ईरानी प्रेसीडेंसी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक राष्ट्रपति तेहरान में मीडिया से बात करते हुए कहा, “हाल में, दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे व्यापारिक संबंध हैं और इस यात्रा के दौरान हम इन संबंधों को लगभग 10 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लिए काम करेंगे.”

अमेरिकी टैरिफ का डर

अमेरिका के नए राष्ट्रपति लगातार टैरिफ की धमकियां दे रहे, ट्रंप का कहना है कि वह ईरान और रूस के साथ काम करने वाले देशों और उनकी कंपनियों पर टैरिफ बढ़ाएंगे. पाकिस्तान अगर अपने व्यापार को ईरान के साथ बढ़ाता है, तो वह अमेरिका के सख्त टैरिफ का शिकार हो सकता है. हालांकि ट्रंप ने हालिया टैरिफ में पाकिस्तान पर 19 फीसद टैरिफ लगाया है, जो पड़ोसी देश बांग्लादेश और भारत से कम है.

कितना है ईरान-पाकिस्तान का व्यापार?

तेहरान और इस्लामाबाद के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है, ईरान के व्यापार संवर्धन संगठन (TPO) में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए उप-प्रमुख कर्बलाए एस्माईली ने IRNA को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मार्च 2024-मार्च 2025 में द्विपक्षीय व्यापार पिछले साल के मुकाबले 13.6 फीसद बढ़कर कुल 3.129 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इस अवधि के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को लगभग 2.423 अरब डॉलर कीमत का सामान निर्यात किया, जबकि पाकिस्तान से आयात 70.6 करोड़ डॉलर रहा. ईरान के निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद, दूध पाउडर और खजूर शामिल थे, जबकि पाकिस्तान से आयातित प्रमुख उत्पाद चावल, तिलहन और विभिन्न मांस उत्पाद शामिल थे. अब इसी व्यापार को दोनों देश 10 बिलियन तक बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।