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प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पद्म भूषण छन्नूलाल मिश्र का निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और पद्म भूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार की सुबह निधन हो गया. वो 89 साल के थे. उनकी तबीयत बीते कुछ दिनों से खराब चल रही थी. कुछ दिन पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी. पंडित छन्नूलाल मिश्र का अंतिम संस्कार बनारस में होगा. आपको बता दें कि पीएम मोदी से खास कनेक्शन रहा है.

आपको बता दें कि छन्नूलाल मिश्र काशी के संगीत घराने के नायाब रत्न पंडित छन्नूलाल मिश्र को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी औ चैती जैसे लोकगीत विधाओंक के गायन के लिए जाने जाते रहे. पंडित छन्नूलाल मिश्र को पद्म विभूषण से भी सम्मानित थे. उनका जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ में हुआ था. उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसिद्ध संगीतकार थे. महज 6 साल की उम्र से ही उन्होंने अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी.

पंडित छन्नूलाल मिश्रा ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में उच्च ग्रेड के कलाकार रह चुके थे. उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थी. वह संगीत जगत के एकलौते ऐसे कलाकार थे जिन्हें पद्मश्री के बजाय पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया था.

पीएम मोदी से भी रहा था उनका खास कनेक्शन

पंडित छन्नुलाल मिश्र का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास खास कनेक्शन रहा है. 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने बनारस से बतौर भाजपा उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी भरी थी तो उस दौरान पंडित छन्नुलाल मिश्र उनके प्रस्तावक रहे थे. जब नरेंद्र मोदी चुनाव जीतकर देश के प्रधानमंत्री  बने तो उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के लिए नवरत्नों को नियुक्त किया था. इन नवरत्नों में पंडित छन्नूलाल मिश्र भी एक थे.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।