लोड हो रहा है...

नोटिस को किया था नजरअंदाज, अब मुसलमान स्वयं तोड़ेंगे अवैध मस्जिद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. संभल में आज दशहरे के दिन अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई. इस दौरान यहां के राय बुजुर्ग गांव में सरकारी जमीन पर बने जनता मैरिज हॉल को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है. इसके बाद इसके बगल में बनी अवैध मस्जिद को भी हटाया जाएगा. संभल मुख्यालय से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर रायबुजुर्ग गांव में जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण पर ये कार्रवाई की. इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को तैनात किया गया है. प्रशासन का दावा है कि मस्जिद और मैरिज हॉल तालाब की जमीन पर बने हुए हैं. जिसके बाद ये कार्रवाई की गई है.

कड़ी सुरक्षा बीच की गई कार्रवाई

बताया जा रहा है कि यहां सरकारी जमीन पर कब्जा करके यहां 550 वर्ग मीटर में मस्जिद और 30 हजार वर्ग फीट में मैरिज हॉल बना हुआ है. दोनों को पूरी तरह गिराया जाएगा. गुरुवार सुबह से ही गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया था. जिसके बाद पूरे इलाके में फ़्लैग मार्च किया गया. जिसके बाद ये कार्रवाई की गई. मैरिज हॉल के बाद अवैध मस्जिद को भी गिराया जाना था लेकिन मस्जिद कमेटी के लोगों ने डीएम, एसपी से मिलकर मस्जिद को खुद हटाने के लिए अब 4 दिन का समय मांगा है. इस मस्जिद को हटाने के लिए 30 दिन पहले ही नोटिस दिया गया था. लेकिन अब कुछ और दिनों का समय दे दिया गया है.

सरकारी जमीन पर अवैध तरह हुआ निर्माण

पुलिस प्रशासन ने गांव के लोगों को अपने घरों में रहने की हिदायत दी है. बताया जा रहा है कि इससे पहले पुलिस अधिकारियों ने गांव के लोगों के साथ बैठक भी की थी. इस मस्जिद का निर्माण दस साल पहले ही सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के किया गया था. भूमि सर्वेक्षण में पाया गया ये ज़मीन ग्राम सभा की है, जिस पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है.

साभार : एबीपी न्यूज

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।