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रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की खबरों का किया खंडन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. टीम इंडिया सिडनी टेस्ट में रोहित शर्मा के बिना उतरी है. इस दौरे पर वह अभी तक पूरी तरह फ्लॉप रहे थे, जिसके चलते इस मैच में वह बाहर बैठे हैं. पिछले कुछ दिनों से ये खबरें चल रही थीं कि मैनेजमेंट अब उन्हें टेस्ट टीम में नहीं चाहता है और ये सीरीज उनके करियर की आखिरी टेस्ट सीरीज है. ऐसे में सबसे बड़े सवाल ये भी है कि रोहित को सिडनी टेस्ट से बाहर निकाला गया है या फिर वह खुद इस मैच से बाहर बैठे हैं. रोहित शर्मा ने अब खुद इस सवाल का जवाब दे दिया है.

रोहित शर्मा ने किया बड़ा खुलासा

रोहित शर्मा ने सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन लंच के समय स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत करते हुए कहा, ‘मैं खुद सिडनी टेस्ट से बाहर बैठा हूं. अभी बल्ला नहीं चल रहा है. मैंने चयनकर्ताओं और कोच को बताया कि मेरे बल्ले से रन नहीं निकल रहे हैं, इसलिए मैंने हटने का फैसला किया. मैं 2 बच्चों का बाप हूं, समझदार हूं, परिपक्व हूं, पता है कब क्या करना है. टीम के आउट ऑफ फॉर्म बल्लेबाजों को इतना महत्वपूर्ण मैच खेलने का मौका नहीं मिलना चाहिए, इसलिए मैंने बाहर बैठने का फैसला किया है.’

रोहित शर्मा ने आगे कहा, ‘अभी रन नहीं आ रहे हैं, लेकिन इसकी गारंटी नहीं है कि 5 महीने बाद भी नहीं आएंगे. मैं कड़ी मेहनत करूंगा. पर ये फैसला कोई रिटायरमेंट का नहीं है. बाहर लैपटॉप, कलम और कागज लेकर बैठे लोग यह तय नहीं करते कि रिटायरमेंट कब आएगा और मुझे क्या फैसले लेने होंगे.’ इसके अलावा रोहित ने बताया कि वह लगातार कोशिश कर रहे थे कि रन बनाएं लेकिन नहीं हो रहा था, ऐसे में उन्होंने सिडनी आने के बाद मैनेजमेंट को बताया कि वह आखिरी मैच नहीं खेलेंगे.

ऑस्ट्रेलिया सीरीज में नहीं चला बल्ला

रोहित शर्मा इस टेस्ट सीरीज में रन बनाने के लिए जूझते हुए नजर आ रहे थे. सीरीज के 3 मैचों में उन्होंने 3, 6, 10, 2 और 9 रन की पारियां खेली थीं. यानी भारतीय कप्तान ने 5 पारियों में 6.20 की औसत से कुल 31 रन बनाए थे. इससे पहले बांग्लादेश और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज में भी वह पूरी तरह फ्लॉप रहे थे. पिछले 8 टेस्ट मैचों में वह एक ही अर्धशतक लगा सके हैं. जिसके चलते रोहित ने इस अहम मैच में बाहर बैठने का फैसला किया, ताकी टीम इंडिया सीरीज में बराबरी कर सके.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।