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मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में किये 48 ट्रांसफर, उमर अब्दुल्ला सरकार टेंशन में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जम्मू. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे से दो दिन पहले, राजभवन और केंद्र शासित प्रदेश में छह महीने पुरानी सरकार के बीच बढ़ती बेचैनी के बीच सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और उसके गठबंधन सहयोगियों के विधायकों की बैठक शुक्रवार को यहां शुरू हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की उपस्थिति में यह बैठक यहां गुपकार में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के आवास पर शुरू हुई। कैबिनेट मंत्री, एनसी के सभी विधायक और मुख्य सचेतक निजामुद्दीन भट के नेतृत्व में तीन कांग्रेस विधायक बैठक में भाग ले रहे हैं।

48 अफसरों के ट्रांसफर पर चर्चा

गठबंधन सहयोगियों की यह अनिर्धारित बैठक उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (LG Manoj Sinha) द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) के 48 अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्ति के आदेश की पृष्ठभूमि में हुई है। तीन दिन पहले 48 नौकरशाहों के विवादास्पद स्थानांतरण ने राजभवन और अब्दुल्ला सरकार के बीच नवीनतम टकराव को जन्म दिया। सरकार एलजी के कदम को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत कानूनी और प्रशासनिक ढांचे का उल्लंघन मानता है। सत्तारूढ़ गठबंधन की यह बैठक जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिले में हाल ही में हुई आतंकी गतिविधियों के बाद गृह मंत्री के केंद्र शासित प्रदेश के दौरे से दो दिन पहले हुई है। शाह 6 अप्रैल को आ रहे हैं और अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान जम्मू और श्रीनगर दोनों में सुरक्षा समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करने वाले हैं।

‘सरकार को किया जा रहा कमजोर’

बैठक में शामिल होने से पहले, सोनावारी से एनसी विधायक हिलाल अकबर लोन ने कहा कि राजभवन निर्वाचित सरकार को ‘कमजोर’ कर रहा है। उन्होंने कहा कि बैठक में उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों पर चर्चा की जाएगी ताकि ऐसी चीजें दोबारा न हों। अब्दुल्ला ने सिन्हा को पत्र लिखकर एकतरफा फैसले की समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि अखिल भारतीय सेवा कैडर के बाहर के अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति निर्वाचित सरकार का विशेषाधिकार है। अब्दुल्ला ने पत्र में कहा है कि ऐसे आदेश निर्वाचित सरकार के कामकाज और अधिकार को कमजोर करते हैं। अब्दुल्ला ने गृह मंत्री शाह के समक्ष यह मामला उठाया है। उन्होंने शिकायत की है कि तबादलों सहित एलजी की कई कार्यवाहियों  ने उनकी सरकार के अधिकार को क्षीण किया है।

ट्रांसफर से जुड़ा अधिकार स्थगित करने की मांग

अब्दुल्ला ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि उनकी पूर्व स्वीकृति के बिना गैर-अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के लिए कोई भी तबादला या नियुक्ति आदेश जारी न किया जाए। उन्होंने मुख्य सचिव से विशेष रूप से 48 जेकेएएस अधिकारियों के तबादले के आदेशों को स्थगित रखने को कहा है।एकजुटता दिखाते हुए कांग्रेस ने भी सिन्हा के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि तबादलों के साथ आगे बढ़ने से पहले एलजी को व्यावसायिक नियमों की मंजूरी का इंतजार करना चाहिए था। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता गुलाम अहमद मीर ने कहा कि एलजी को अधिक धैर्य रखना चाहिए था, उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की कार्रवाई प्रशासन में विश्वास को कम कर सकती है।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।