नई दिल्ली: भारत के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—में विधानसभा चुनावों की तारीखों के एलान के साथ ही देश का सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग द्वारा चुनावी कार्यक्रम जारी करते ही राजनीतिक दलों ने ‘मिशन 2026’ के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं साख बचाने की लड़ाई है, तो कहीं सत्ता परिवर्तन का संकल्प।
1. पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ बनाम ‘दादा’ की सीधी जंग
पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सिमटता दिख रहा है।
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भाजपा की रणनीति: भाजपा ने इस बार ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ का मंत्र अपनाया है। केंद्रीय मंत्रियों और कद्दावर नेताओं की रैलियों के जरिए पार्टी एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को भुनाने की कोशिश कर रही है।
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TMC का पलटवार: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जन कल्याणकारी योजनाओं जैसे ‘लक्ष्मी भंडार’ और स्थानीय अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही हैं। पार्टी का फोकस महिला मतदाताओं और ग्रामीण बंगाल पर है।
2. असम: विकास और विरासत का दांव
असम में भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन (NDA) अपनी उपलब्धियों के दम पर दोबारा सत्ता में आने का दावा कर रहा है।
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मुख्य मुद्दे: बुनियादी ढांचे का विकास, ‘डबल इंजन’ सरकार के फायदे और घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दे चुनाव के केंद्र में हैं।
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विपक्ष की घेराबंदी: कांग्रेस इस बार क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मजबूत ‘महाजोत’ (गठबंधन) के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है। चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी और बेरोजगारी यहां बड़े चुनावी मुद्दे बनकर उभरे हैं।
3. केरल: वामपंथ बनाम कांग्रेस की वैचारिक लड़ाई
केरल की राजनीति हमेशा से LDF (वामपंथी गठबंधन) और UDF (कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन) के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
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ऐतिहासिक संदर्भ: केरल में दशकों से हर पांच साल में सरकार बदलने का रिवाज रहा है। हालांकि, मौजूदा सरकार विकास कार्यों के दम पर इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश में है।
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धार्मिक समीकरण: सबरीमाला और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक समूहों का समर्थन इस बार चुनाव परिणामों को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
4. तमिलनाडु: द्रविड़ राजनीति का नया अध्याय
तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच की जंग इस बार काफी दिलचस्प है।
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स्थानीय मुद्दे: जल प्रबंधन, नीट (NEET) परीक्षा का विरोध और भाषाई गौरव यहां के मतदाताओं के लिए सबसे ऊपर हैं।
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गठबंधन का गणित: डीएमके जहां कांग्रेस और वामपंथियों के साथ मजबूती से खड़ी है, वहीं एआईएडीएमके भाजपा के साथ मिलकर चुनावी मैदान में है। अभिनेता से नेता बने दिग्गजों की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है।
5. पुडुचेरी: छोटे राज्य में बड़ी सियासी बिसात
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में मुकाबला भले ही छोटा हो, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कम नहीं है। यहां की राजनीति में ‘दलबदल’ और ‘गठबंधन’ सबसे बड़े कारक बनकर उभरे हैं।
जनता का मूड क्या है?
इन पांच राज्यों के चुनाव न केवल राज्यों की सत्ता तय करेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी एक मनोवैज्ञानिक आधार तैयार करेंगे। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती और डिजिटल निगरानी के कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्य चुनाव हाइलाइट्स:
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महिला मतदाता: सभी राज्यों में महिला वोटर्स की संख्या निर्णायक भूमिका में है।
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डिजिटल प्रचार: सोशल मीडिया और व्हाट्सएप वॉर रूम के जरिए दल युवा मतदाताओं को साध रहे हैं।
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क्षेत्रीय अस्मिता: विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और भाषा की रक्षा का मुद्दा हर राज्य में गूंज रहा है।
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