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बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कलात जिले के मंगोचार शहर को पाकिस्तान से छीना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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क्वेटा. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. वहीं पाकिस्तान के बलूचिस्तान के कलात जिले के मंगोचर शहर पर बाओच विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया है. सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूच विद्रोहियों ने मंगोचर में सरकारी दफ्तरों और इमारतों पर कब्ज़ा कर लिया है. शनिवार को इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सरकारी इमारतों पर बलूच विद्रोहियों को दिखाया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहर में बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तान की सेना के बीच झड़पें हुईं हैं. बलूच विद्रोहियों ने शहर में पाकिस्तान की सेना के कैंप पर हमला किया. विद्रोहियों ने कथित तौर पर पाकिस्तान की सेना के कुछ हथियार भी जब्त कर लिए.

मंगोचर शहर में पाकिस्तान की सेना के शिविर पर बलूच विद्रोहियों की ओर से किए गए हमले की ये खबरें ऐसे समय में सामने आईं जब भारत के साथ तनाव बढ़ रहा. पाकिस्तान की सेना ने कथित तौर पर भारत से हमले की आशंका के चलते पश्चिमी सीमा पर अपने सैनिकों को तैनात कर दिया था. पिछले कुछ महीनों में बलूच विद्रोहियों ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान के सुरक्षाकर्मियों पर हमले तेज़ कर दिए हैं. 26 अप्रैल को पश्चिमी पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आईडी ब्लास्ट में कम से कम दस अर्धसैनिक बल के जवान मारे गए. बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी.

पाकिस्तान की ओर से दावा किया है कि वह सभी यात्रियों को रिहा कर रहा है. रेबल के मुताबिक, इस घटना में 18 सैनिक और 33 फाइटर्स सहित 64 लोग मारे गए और 38 और लोग घायल हो गए हैं. हालांकि, बीएलए ने पाकिस्तान के बयान का खंडन किया है. विद्रोही समूह ने दावा किया है कि उसने सुरक्षा बलों के 50 सदस्यों और 214 बंधकों को मार डाला है. हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थिति और बिगड़ने लगी. 22 अप्रैल को पहलगाम के पास बैसरन मैदान में पांच-छह आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी, जिसमें एक स्थानीय गाइड भी शामिल था.

शुरुआत में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सहयोगी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने हमले की जिम्मेदारी ली. हालांकि, कुछ दिनों बाद इसने अपनी भूमिका से इनकार कर दिया. ध्यान देने वाली बात ये है कि पहलगाम हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हिंदू विरोधी टिप्पणी के लगभग एक हफ्ते बाद हुआ था.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।