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पाकिस्तान ने पीओके में पटाखों और लाउडस्पीकर पर लगाया प्रतिबंध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुजफ्फराबाद. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के कड़े तेवर से पाकिस्तान में खौफ का माहौल है। भारत को अमेरिका का पूरा समर्थन मिलने से बौखलाया पाकिस्तान अब चीन और खाड़ी देशों के सामने मदद की गुहार लगा रहा है। इस बीच, पाकिस्तान ने PoK में सख्त कदम उठाते हुए इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान को डर है कि भारत पीओके पर हमला कर सकता है। यही वजह है कि उसने PoK में पटाखों पर बैन लगा दिया है। झेलम वैली में लाउडस्पीकर बजाने पर भी रोक है। इतना ही नहीं, शादियों में म्यूजिक बजाने तक पर पाबंदी लगा दी गई है।

‘राफेल हो या राफेल का मामा, हम तैयार हैं’

पाकिस्तान ने पीओके में करीब 1000 मदरसों को बंद कर दिया है और सभी पब्लिक एक्टिविटीज पर रोक लगा दी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के राफेल फाइटर जेट्स को लेकर तंज कसते हुए कहा, ‘राफेल हो या राफेल का मामा, हम तैयार हैं।’ उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना का मनोबल ऊंचा है और अगर भारत ने कोई हरकत की तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों से साफ है कि हमला तय है। पाकिस्तानी पीएम के कॉर्डिनेटर राणा एहसान अफ़ज़ल खान ने भी भारत को धमकी दी है।

पाकिस्तान ने चीन को दिया 40 टैंकों का ऑर्डर

पाकिस्तान ने आनन-फानन में चीन के राजदूत जियांग झैडोंग से मुलाकात कर मदद मांगी। उसने चीन से 40 VT-4 टैंकों का ऑर्डर भी दिया है। अभी पाकिस्तान के पास 350 VT-4 टैंक हैं, लेकिन भारत की ताकत के सामने ये नाकाफी हैं। पाकिस्तानी नेता भले ही गीदड़भभकी दे रहे हों, लेकिन भारत के दबाव से उनकी हालत पस्त है। बता दें कि पहलगाम हमले के बाद भारत आतंकियों और उनके आकाओं को सबक सिखाने की बात कर चुका है। ऐसे में PoK में इमरजेंसी और बैन जैसे कदम दिखाते हैं कि पाकिस्तान भारत के अगले कदम को लेकर किस कदर खौफ में है।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।