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एजबेस्टन टेस्ट में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने ठोका दोहरा शतक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. शुभमन गिल ने आखिरकार वो कर दिखाया जिसकी उम्मीद उनसे हर भारतीय फैन की थी. गिल ने इंग्लैंड में अपनी कमाल फॉर्म जारी रखते हुए एजबेस्टन टेस्ट में दोहरा शतक लगा दिया. लीड्स टेस्ट में शुभमन गिल ने बतौर कप्तान अपनी पहली ही पारी में शतक लगा दिया था और अब उन्होंने दूसरे टेस्ट में दोहरा शतक लगा दिया है. इस दोहरे शतक के साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. आइए आपको बताते हैं शुभमन गिल ने क्या कारनामे किए हैं.

शुभमन गिल ने दोहरा शतक तोड़े ये रिकॉर्ड

  • शुभमन गिल ने एजबेस्टन में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया. वो इंग्लैंड में डबल सेंचुरी लगाने वाले पहले इंडियन कप्तान हैं.
  • शुभमन गिल ने पहली बार टेस्ट करियर में दोहरा शतक लगाया है.
  • शुभमन गिल इंग्लैंड में दोहरा शतक लगाने वाले सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी हैं.
  • शुभमन गिल एजबेस्टन में दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं.
  • शुभमन गिल इंग्लैंड में दोहरा शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय हैं. उनसे पहले गावस्कर और द्रविड़ ने ये कारनामा किया है.
  • शुभमन गिल इंग्लैंड में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय बन गए, उन्होंने गावस्कर के 221 रनों का रिकॉर्ड तोड़ा.
  • 6 साल बाद किसी भारतीय कप्तान ने टेस्ट में दोहरा शतक जड़ा.
  • शुभमन गिल पहले भारतीय कप्तान हैं जिन्होंने 25 साल की उम्र तक विदेशी टेस्ट सीरीज में 300 से ज्यादा रन बनाए हैं.

शुभमन गिल की गजब बैटिंग

शुभमन गिल ने अपने करियर में कई बड़ी पारियां खेली हैं लेकिन एजबेस्टन टेस्ट में उनका ये दोहरा शतक सबसे बेहतरीन इनिंग्स में से एक होगी. शुभमन गिल ने इस पारी में बहुत ही कम खराब शॉट्स खेले. उन्होंने सिर्फ अपने रन नहीं बनाए बल्कि उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों के साथ भी अहम साझेदारियां की. करुण नायर, ऋषभ पंत के साथ उनकी साझेदारी पचास से ज्यादा रनों की रही लेकिन रवींद्र जडेजा के साथ मिलकर उन्होंने 200 से ज्यादा रन जोड़े, जिसकी वजह से भारतीय टीम 500 पार पहुंचने में कामयाब रही.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।