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चुनी गईं फाइनलिस्ट बुंदेली शेफ के किचन में लगाएंगी तड़का, पाक कला का होगा कड़ा मुकाबला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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सेमीफाइनल राउंड में 5 फाइनलिस्ट चुनी गईं

11 मई को झाँसी में होगा ग्रैंड फिनाले

इंदौर, 6 मई, 2025: बुंदेलखंड में अपनी अलग पहचान बना चुके बुंदेली शेफ सीज़न 2 का सफर अपने आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ चुका है, जहाँ सभी फाइनलिस्ट बुंदेली शेफ का ताज पाने के लिए उत्सुक हैं। इस प्रतियोगिता के सेमीफाइनल राउंड में 7 अलग-अलग महिला जजेस ने प्रतिभागियों के बेसन से बने व्यंजनों के आधार पर फाइनलिस्ट चुने। प्रतियोगिता का आयोजन बुंदेलखंड के जाने-माने प्लेटफॉर्म बुंदेलखंड 24×7 द्वारा किया जा रहा है, जिसके सेमीफाइनल राउंड से पाँच प्रतिभागियों ने फाइनल में अपनी जगह बनाई।

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सागर से आईं रश्मि ठाकुर ने पारंपरिक मोहनथाल बनाकर जजेस का दिल जीत लिया, वहीं ललितपुर की रुचि जैन का मिठासभरा मैसूर पाक सभी को खास लगा। झाँसी की साक्षी श्रीवास्तव ने बेहद स्वादिष्ट बेसन चूरमा लड्डू पेश किया, जबकि ज़ाहिदा परवीन ने स्थानीय पकवान डला टपरिया से जजेस का दिल जीत लिया। वहीं झाँसी की पूनम रैकवार ने पारंपरिक बेसन के लड्डू बनाकर अपनी जगह पक्की की।

अब ये पाँच फाइनलिस्ट 11 मई को झाँसी में आयोजित होने वाले ग्रैंड फिनाले में आमने-सामने होंगी। खास बात यह है कि सभी फाइनलिस्ट को उसी समय कोई व्यंजन बताया जाएगा जो उन्हें बनाना होगा। इस अवसर पर बुंदेली शेफ सीज़न 1 की विजेता शमिता सिंह मौजूद रहेंगी और प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाएंगी।

प्रतियोगिता के बारे में बात करते हुए बुंदेलखंड 24×7 के डायरेक्टर आसिफ पटेल ने कहा, “हमने इस प्रतियोगिता की शुरुआत केवल पाक कला को मंच देने के लिए नहीं की, बल्कि हम चाहते हैं कि क्षेत्र की महिलाएं खुद पर भरोसा करें। हमारे समाज में कई बार महिलाएं अपने हुनर को कम आँकती हैं। ‘बुंदेली शेफ’ उन्हें बताता है कि उनकी पहचान सिर्फ घर तक सीमित नहीं है, अपने हुनर के दम पर वे समाज में नेतृत्व कर सकती हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकती हैं।”

बुंदेली शेफ केवल एक कुकिंग प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की महिलाओं को उनकी प्रतिभा और परंपरा के साथ जोड़ने वाला एक सांस्कृतिक मंच है। यह मंच न केवल स्वाद और परंपरा का संगम है, बल्कि यह उस बदलाव की शुरुआत है, जिसमें महिलाएं अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ रही हैं। इस प्रतियोगिता ने बुंदेलखंड की रसोई से निकलने वाले पारंपरिक व्यंजनों को एक नई पहचान दी है और महिलाओं को उनके भीतर छिपी क्षमता से परिचित कराया है।

बुंदेली शेफ सीज़न 2 को सफल बनाने में कई साझेदारों का अहम योगदान है। रुद्राणी कला ग्राम ने इसमें सहयोग दिया है। पीआर 24×7 प्रतियोगिता का पीआर पार्टनर है, वहीं रसा एरोमा और माय कोकोनट्ज़ ने गिफ्ट पार्टनर के रूप में सहयोग किया है। डिजिटल प्रचार के लिए ओओएच बाज़ार ने सहयोग दिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।