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संभल में तालाब की जगह पर बने 80 अवैध घरों को खाली करने का नोटिस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लखनऊ. संभल में इन दिनों अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन विशेष अभियान चला रही है. अब इस कड़ी में अब उन अवैध मकानों को भी नोटिस जारी किया गया है. इस नोटिस में कहा गया है कि जिन लोगों का मकान अवैध है वो 15 दिनों में इन घरों को खाली कर दें. प्रशासन के अनुसार जिन घरों को नोटिस दिया गया है वो अवैध जमीन पर बना हुआ है. अगर तय समय के अंदर इन मकानों को नहीं हटाया गया तो प्रशासन इनपर भी बुलडोजर की कार्रवाई करेगा.

आपको बता दें कि संभल के नखासा थाना क्षेत्र में 8 बीघा तालाब की जमीन पर भूमाफियाओं ने प्लॉटिंग कर ज़मीन को बेच दिया. तालाब की जमीन लगभग 80 लोगों ने मकान बनवा लिए. कब्जे की जानकारी होने पर तहसील प्रशासन ने 40 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किया गया है.प्रशासन का साफ कहना है कि सरकारी तालाब पर खड़े किए गए मकान को खाली कराया जाएगा. प्रशासन की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है. संभल सदर तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया की हातिम सराय में 8 बीघा का तालाब की जमीन पर दबंग भूमिया अवैध तरीके से प्लाटिंग करवा रहे हैं. तालाब की जमीन पर 80 मकान तक बन चुके हैं. इन मकानों में लोग रह रहे हैं.

लेखपाल ने 40 से अधिक मकान पर नोटिस चस्पा किए हैं. तालाब की भूमि किसी भी कीमत पर निजी कब्जे में नहीं दी जा सकती. हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक तालाब की जमीन पर अगर अवैध निर्माण पाया जाता है तो उसकी सुनवाई की भी जाती है. तहसीलदार का कहना है कि टैक्स देने से जमीन बैनामा नहीं हो जाती हो सकता है भूमिया में इन लोगों को गलत तरीके से फर्जी बैनामा कर दिया हो तालाब की भूमि का कोई बैनामा संभव ही नहीं है. अवैध कबजेदारों को 15 दिन का समय दिया गया है इसके बाद तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त करने के लिए बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी.

हातिम सराय में रहने वाले इब्राहिम ने बताया कि हमारा मकान पक्का है, टैक्स भी दे रहे हैं बिजली का बिल भी दे रहे हैं, सड़क बनी हुई है. मैं यहां अपने मकान में 5 साल से रह रहा हूं. हम जगह खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. मोहम्मद जुबेर ने बताया कि नोटिस में लिखा हुआ है कि हमने अवैध कब्जा किया है लेकिन हमने यह जमीन खरीदी थी और अपना मकान बनवाया था. हम यह पर लगभग 7 से 8 साल हो गए हमने जमीन खरीदी थी. नोटिस में कह रहे हैं कि यह तालाब था तो गवर्नमेंट ने सड़क क्यों बनाई यहां पर? बिजली की लाइन क्यों पास हुई? वाटर लाइन भी गवर्नमेंट किस बात के लिए है एम? क्या उसको पहले नहीं दिखता यहां पर मकान बनाने की अनुमति क्यों मिली?

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।