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दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ में रिधिमा तिवारी बनीं एक रहस्यमयी राक्षसी, जाने!

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मध्य प्रदेश, अक्टूबर 2025: रहस्य, शक्ति और फैंटेसी से भरी दुनिया में कदम रखते हुए, अभिनेत्री रिधिमा तिवारी अब सन नियो के लोकप्रिय शो ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ में एक नई ऊर्जा लेकर आ रही हैं। शो में उनकी एंट्री शक्तिशाली राक्षसी के रूप में होगी, जिससे कहानी एक अप्रत्याशित और रोमांचक मोड़ लेगी। उनके आने से दर्शकों को भरपूर ड्रामा, रहस्य और अलौकिक ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है।

अपना अनुभव साझा करते हुए रिधिमा तिवारी ने कहा,“मैं इस शो का हिस्सा बनकर बहुत उत्साहित हूँ, क्योंकि इस प्रोडक्शन हाउस के साथ यह मेरा पहला अनुभव है। हमारी टीम बहुत शानदार है, भले ही मैं शो में छह महीने बाद जुड़ी हूँ, लेकिन सभी ने मेरा पूरे सहज भाव से स्वागत किया। एक कलाकार के रूप में अपने हर किरदार को ईमानदारी से निभाना हमारी ज़िम्मेदारी होती है और मैं इसे पूरी गंभीरता से निभाती हूँ। मेरे किरदार का लुक बेहद ख़ास और अनोखा है। स्टाइलिंग और डिज़ाइनिंग में टीम ने जो मेहनत की है, वह बहुत ही जबरदस्त और सराहनीय है।”

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अपने किरदार के बारे में बात करते हुए उन्होंने आगे कहा,“मैं राक्षसी का किरदार निभा रही हूँ। यह किरदार सौ वर्षों की तपस्या के बाद अपनी आध्यात्मिक शक्तियों का उपयोग कर शहर में नकारात्मक ऊर्जा फैला रही है। वह सीधे हीरोइन से नहीं लड़ती, बल्कि अलग-अलग शक्तियों को नियंत्रित कर पूरे उज्जैन शहर में विनाश फैलाती है। हर बार वह इन ऊर्जाओं को दिशा देती है, जिससे उसका किरदार और भी शक्तिशाली और कई उतार-चढ़ाव से भरा है।चूँकि यह एक फैंटेसी थ्रिलर है, इसलिए इसमें कई दिलचस्प मोड़ और ट्विस्ट देखने को मिलेंगे, जिन्हें बच्चे और परिवार दोनों पसंद करेंगे। यह किरदार पूरे समर्पण, ऊर्जा और सहनशक्ति की मांग करता है, लेकिन मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूँ।”

‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ उज्जैन की एक लड़की दिव्या की कहानी है, जिसकी ज़िंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है जब उसकी मुलाकात प्रेम से होती है। प्यार, रहस्य और बीते समय के छिपे सच से बुनी यह कहानी परंपरा और तकनीक के संगम को खूबसूरती से दर्शाती है। शो में मेघा रे और सुरज प्रताप सिंह मुख्य भूमिकाओं में हैं।

देखिए ‘दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी’ हर रात 8:30 बजे, केवल सन नियो पर!

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।