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आईएफएस अधिकारी ने इमारत से कूदकर की आत्महत्या

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. दिल्ली में चाणक्यपुरी से एक अधिकारी द्वारा आत्महत्या करने का मामला प्रकाश में आया है। बताया गया कि चाणक्यपुरी इलाके में भारतीय विदेश सेवा (IFS, आईएफएस) के एक अधिकारी ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली।

घटना की जांच में जुटी पुलिस

उधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। अभी आत्महत्या करने का कारण नहीं पता चला है। पुलिस की जांच के बाद ही आईएफएस अधिकारी की मौत का कारण सामने आ सकेगा। फिलहाल पुलिस अधिकारी जांच में जुटे हुए हैं।

पुलिस ने की मौत की पुष्टि

पुलिस ने मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक की पहचान 35 से 40 साल के जितेंद्र रावत के रूप में हुई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आईएफएस अधिकारी जितेंद्र रावत उत्तराखंड के रहने वाले थे।

जांच में सामने आई ये जानकारी

पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में यह जानकारी सामने आई है कि जितेंद्र डिप्रेशन में थे और उनका इलाज भी चल रहा था। वह चाणक्यपुरी में एमईए की रेजीडेंशियल सोसायटी में पहली मंजिल पर रहते थे, लेकिन शुक्रवार सुबह पांच बजे उन्होंने चौथी मंजिल पर जाकर छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय उनकी मां घर पर अकेली थीं। उनकी पत्नी और दो बच्चे देहरादून में रहते हैं। बताया गया कि उनकी पोस्टिंग एमईए में थी।

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घटना को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं

वहीं, सुबह के समय जब आसपास के लोगों को इस घटना के बारे में जानकारी हुई तो तरह-तरह चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इस घटना को पारिवारिक कलह तो कोई दूसरे एंगल से जोड़ रहा है। हालांकि, घटना के पीछे का सच क्या है, यह अभी जांच का विषय है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।