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कॉमेडियन कुणाल कामरा को मद्रास हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल तक गिरफ्तारी से दी छूट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार, 7 अप्रैल, 2025 को मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 17 अप्रैल तक बढ़ा दी। यह सुरक्षा उनके खिलाफ मुंबई में खार पुलिस द्वारा दर्ज एक मामले के संबंध में थी, जिसमें कथित तौर पर ‘नया भारत’ नाम के अपने हालिया कॉमेडी शो के दौरान महाराष्ट्र के राजनेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई थी।

कुणाल की बढ़ी अंतरिम जमानत

न्यायमूर्ति सुंदर मोहन ने यह आदेश तब पारित किया, जब अधिवक्ता वी. सुरेश ने एस. तन्वी की सहायता से अदालत को बताया कि उन्होंने अपने मुवक्किल को अंतरिम अग्रिम जमानत देते हुए 28 मार्च, 2025 को अदालत द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार खार पुलिस को निजी नोटिस दिया था। न्यायाधीश ने रजिस्ट्री को यह पता लगाने का निर्देश दिया कि क्या अदालत का नोटिस भी दिया गया था और मामले को 17 अप्रैल को फिर से सूचीबद्ध किया जाए।

कुणाल के वकील की दलीलें

सोमवार को जब मामले की सुनवाई हुई तो याचिकाकर्ता के वकील वी सुरेश ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ महाराष्ट्र में तीन और एफआईआर दर्ज की गई हैं। उनके बुजुर्ग माता-पिता को उनके मुंबई स्थित आवास पर जाकर परेशान किया, हालांकि वह 2021 से तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में रह रहे थे और कॉमेडी शो के दर्शकों को भी पूछताछ के लिए बुलाया था।

17 अप्रैल को होगी सुनवाई

न्यायाधीश ने मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल तय की है। मुंबई पुलिस द्वारा दो बार बुलाए जाने के बाद स्टैंड-अप कॉमेडियन ने हाल ही में मुंबई में अपने शो के दौरान शिंदे पर तीखी टिप्पणी की, जिससे वह मुश्किल में पड़ गए और बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद मुंबई के खार में हैबिटेट कॉमेडी क्लब में कामरा के शो से पैदा हुआ है, जहां उन्होंने राजनेता को निशाना बनाते हुए एक पैरोडी गाना गाया था। इस हरकत के बाद शिवसेना समर्थकों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने क्लब और होटल में तोड़फोड़ की।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।