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नरेंद्र मोदी एससीओ में भाग लेने के लिए जाएंगे चीन, जापान का भी करेंगे दौरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्‍ली. इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा होनी है. पीएम मोदी जापान और चीन के दौरे पर जाएंगे. जहां उनकी जापान की यात्रा द्विपक्षीय हैं जबकि चीन की यात्रा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए है.  गलवान में दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद पीएम मोदी की यह पहली चीन यात्रा होगी.

पहले जाएंगे जापान

पीएम मोदी 30 अगस्त को जापान पहुंचेंगे. यहां पर वह जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. यह मीटिंग दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को गहरा करने पर केंद्रित होगी. इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में नई शिंकानसेन E10 तकनीक को शामिल करने पर चर्चा. रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक रणनीति में समन्वय, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर भी चर्चा होगी. साथ ही जापानी कंपनियों के लिए भारत में निवेश के अवसर बढ़ाने पर फोकस.

2019 के बाद चीन का दौरा

जापान के बाद पीएम मोदी सीधे चीन जाएंगे.  प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चीन के तियानजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. साल 2019 के बाद यह उनकी के बाद पहली चीन यात्रा होगी. SCO के सदस्य देशों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, और व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.  भारत-चीन संबंधों में स्थिरता और संवाद की बहाली की कोशिश होगी.

पुतिन और जिनपिंग के साथ मुलाकात

सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से अनौपचारिक मुलाकात की संभावना है. इससे पहले अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में काम ने गति पकड़ी थी.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।