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“अक्सर मुझे खुद एक्शन शूट करना पड़ता है”: ‘सालाकार’ में फारूक कबीर का दिल से कोरिओग्राफ किया गया एक्शन खींच रहा है सबका ध्यान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अगस्त 2025: जियोहॉटस्टार पर एक नई वेब सीरीज़ आ रही है, जिसका नाम है ‘सालाकार’ और इसके डायरेक्टर हैं फारूक कबीर। इसका ट्रेलर भी आ गया है। इसमें मौनी रॉय, नवीन कस्तूरिया और मुकेश ऋषि जैसे कलाकार शामिल हैं। यह देशभक्ति से भरी एक जासूसी कहानी है, जिसमें खूब सारे इमोशन्स और एक्शन हैं। इस सीरीज़ के एक्शन सीन बहुत खास हैं, क्योंकि ये सिर्फ दिखाने के लिए नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरी कहानी और भावना भी है।

फारूक कबीर कहते हैं, “मेरे लिए एक्शन सिर्फ मारपीट नहीं है, बल्कि यह भावनाओं की एक कहानी है। हर मुक्का, हर चेज़ और हर गिरना किसी फीलिंग को दिखाता है, चाहे वह प्यार, डर, गुस्सा या दिल का टूटना हो।”

यही वजह है कि वे अक्सर एक्शन सीन्स खुद ही शूट करते हैं। वे चाहते हैं कि एक्शन एकदम असली लगे, ऐसा लगे, जैसे वह सच में हो रहा हो, न कि सिर्फ नाटक हो। वे बताते हैं कि उन्होंने एक बार अभिनेता विद्युत जामवाल से कहा था, “जो कुछ भी तुमने सीखा है, सब भूल जाओ और लखनऊ के एक ऐसे आदमी की तरह लड़ो, जिसका दिल टूट गया हो।”

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‘सालाकार’ की कहानी एक ऐसे आदमी के सफर के बारे में है, जो 1978 में एक जासूस बनने की कोशिश कर रहा है। वह इस रास्ते में बहुत-सी गलतियाँ करता है और चोट भी खाता है, लेकिन फिर भी आगे बढ़ता है। फारूक कबीर कहते हैं, “यह शो एक ऐसे हीरो की कहानी है, जो अपनी कमियों में भी बहादुरी दिखाता है, यह एक सच्ची और इमोशनल लड़ाई की कहानी है।”

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।