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सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने साइबरस्पेस और एम्फीबियस ऑपरेशंस के संयुक्त सिद्धांतों के अवर्गीकृत संस्करण जारी किए

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव ने 07 अगस्त, 2025 को नई दिल्ली में चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी की बैठक के दौरान साइबरस्पेस ऑपरेशंस और एम्फीबियस ऑपरेशंस के लिए संयुक्त सिद्धांतों के सार्वजनिक संस्करणों को औपचारिक रूप से जारी किया। इन सिद्धांतों का सार्वजनिक होना संयुक्त युद्ध-लड़ने की अवधारणाओं की दृश्यता, पहुंच और व्यापक प्रसार को बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

साइबरस्पेस संचालन के लिए संयुक्त सिद्धांत राष्ट्रीय साइबरस्पेस हितों की रक्षा, आक्रामक और रक्षात्मक साइबर क्षमताओं को एकीकृत करने और तीनों सेनाओं में समन्वित संचालन को सक्षम बनाने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह खतरे-सूचित योजना, दृढ़ता निर्माण, वास्तविक समय में खुफिया एकीकरण और संयुक्त साइबर क्षमताओं के विकास पर बल देता है।

जल-थल अभियानों के लिए संयुक्त सिद्धांत, समुद्री, वायु और थल सेनाओं को एकीकृत करके जल-थल अभियानों की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की रूपरेखा को परिभाषित करता है। यह तट पर अभियानों को प्रभावित करने के लिए अंतर-संचालनीयता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और संयुक्त बल प्रयोग पर बल देता है।

सीडीएस ने सैन्य अंतरिक्ष अभियान, विशेष बल अभियान, हवाई/हेलीबोर्न अभियान, एकीकृत रसद, बहु-क्षेत्रीय अभियान जैसे युद्ध के समकालीन और विशिष्ट क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए कई नए सिद्धांतों/प्राथमिकताओं का विकास शुरू किया है। ये सिद्धांत हितधारकों और नीति निर्माताओं को संयुक्त सैन्य अभियानों की प्रभावी योजना और सुचारू क्रियान्वयन के लिए एक साझा शब्दावली और दिशानिर्देश प्रदान करेंगे। संयुक्त सिद्धांतों को https://ids.nic.in/content/doctrines पर देखा जा सकता है ।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।