लोड हो रहा है...

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के डर से शुरू की न्यूक्लियर प्लांट के पास सैन्य एक्सरसाइज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

तेहरान. ईरान की आर्म फोर्सेस ने मिडिल इस्फ़हान प्रांत में नतांज़ यूरेनियम इनिचमेंट फैसिलिटी के पास बड़े पैमाने पर ज्वाइंट डिफेंस एक्सरसाइज शुरू की. इस बात की जानकारी स्टेट टेलीवीजन के जरिए दी गई है. आईआरआईबी टीवी ने बताया कि ‘इक्तेदार’ (पावर) 1403 एक्सरसाइज खतम अल-अनबिया एयर डिफेंस बेस कमांडर कादर रहीमजादेह के हुक्म के बाद शुरू किया गया था.

परमाणु की हिफाजत

आईआरआईबी के मुताबिक, पहले फेज में इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स यूनिट्स “मुश्किल इलेक्ट्रॉनिक जंग के हालातों के तहत कई हवाई खतरों के खिलाफ परमाणु स्थल की चौतरफा हिफाजत” करेंगी.

क्या है इस एक्सरसाइज का मतलब क्या?

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, आईआरजीसी के प्रवक्ता अली-मोहम्मद नैनी ने सोमवार को कहा कि सालाना प्रैक्टिस का मकसद सैन्य तैयारियों को बनाए रखना और बेहतर बनाना है, इसके साथ ही संभावित सैन्य खतरों और तोड़फोड़ की गतिविधियों का मुकाबला करना और राष्ट्रीय मनोबल को बढ़ाना है.

अमेरिका से है ईरान को खतरा

यह एक्सरसाइज अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस के जरिए पिछले हफ्ते रिपोर्ट किए जाने के बाद की गई है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन को ईरानी परमाणु सुविधाओं पर संभावित अमेरिकी हमले के ऑप्शन पेश किए थे.

- Advertisement -

ईरान ने दिया बातचीत का संकेत

सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघेई ने कहा कि देश अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में फिक्र को दूर करने और प्रतिबंधों को हटाने के लिए “सम्मान और गरिमा के आधार पर” बातचीत के लिए तैयार है. मंत्रालय ने यह टिप्पणी तेहरान में एक हफ्ते प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच वार्ता की संभावना के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में की.

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।