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कालाबाजारी, खाद की किल्लत और धान खरीद में बाटीदारों के अधिकारों को नजरअंदाज न करे सरकार : आर बी सिंह पटेल (राष्ट्रीय महासचिव व मध्य प्रदेश प्रभारी, अपना दल ‘एस’)

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भोपाल , दिसंबर 2025 अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर.बी. सिंह पटेल ने राज्य की मोहन सरकार से किसान हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धान क्रय केंद्रों पर हो रही अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जो किसी भी तरह उचित नहीं है।

पटेल ने कहा कि प्रदेश के कई धान क्रय केंद्रों पर किसानों की ट्रॉलियों को यह कहकर वापस कर दिया जा रहा है कि उनका धान खरीदने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार किसानों के साथ सरासर अन्याय है और इससे भ्रष्टाचार की आशंका भी नजर आती है। आर.बी. सिंह पटेल ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी किसानों की खुशहाली के लिए निरंतर काम कर रहे हैं, लेकिन क्रय केंद्रों पर बैठा स्टाफ किसानों को अपमानित कर रहा है और उनसे सुविधा शुल्क जैसी अनुचित अपेक्षाएं रख रहा है। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताया।

पटेल ने मांग की कि जो किसान बटाई पर खेती करते हैं, उन्हें भी क्रय केंद्रों और मंडियों में पंजीकरण की सुविधा दी जाए, ताकि उनका धान भी सरकारी दर पर खरीदा जा सके। उन्होंने कहा कि बाटीदार भी किसान का ही हिस्सा हैं और उन्हें अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि धान कटने के बाद रबी की बुवाई और फसल वृद्धि के लिए खाद की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे समय में खाद की किल्लत किसानों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए।

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पटेल ने निवेदन करते हुए कहा कि खाद की कालाबाज़ारी पर रोक लगाना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुआ तो किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपना दल (एस) किसानों के मुद्दों को लेकर पूरी तरह सजग है और उनकी समस्याओं को उठाना पार्टी का कर्तव्य है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।