लोड हो रहा है...

चीन ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने के लिए दिया एक और वर्ष का समय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पाकिस्तान को एक बार फिर चीन ने बचा लिया है और उसके भीख के कटोरे को भर दिया है. हुआ यह कि चीन ने 2 अरब डॉलर के कर्ज की अदायगी की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है जिससे पाकिस्तान को तत्काल वित्तीय राहत मिली है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और विदेशी कर्ज चुकाने में मुश्किलों का सामना कर रहा है. हालांकि विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान के लिए राहत से ज्यादा धीमा जहर मान रहे हैं क्योंकि बढ़ते कर्ज के कारण देश की अर्थव्यवस्था चीन पर और अधिक निर्भर होती जा रही है.

कर्ज अदायगी विस्तार की पुष्टि..

असल में समा टीवी की एक ऑनलाइन रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस कर्ज अदायगी विस्तार की पुष्टि की है. मंत्रालय के अनुसार इस फैसले से पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने और अपनी आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी. चीन पहले भी पाकिस्तान को कर्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए सहयोग देता रहा है. खासकर चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत कई परियोजनाओं में निवेश किया गया है. हालांकि पाकिस्तान की कुल विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है.

विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट..

हाल के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते में 51.9 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई जिससे भंडार घटकर 15.87 अरब डॉलर रह गया. हालांकि, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के भंडार में 27.1 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 11.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया. लेकिन दूसरी ओर कमर्शियल बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में 79 मिलियन डॉलर की भारी गिरावट आई. जिससे यह घटकर 4.62 अरब डॉलर रह गया.

अर्थव्यवस्था और भी कमजोर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान के बढ़ते विदेशी कर्ज और घटते भंडार के चलते उसकी अर्थव्यवस्था और भी कमजोर हो सकती है. चीन का यह नया कर्ज विस्तार पाकिस्तान के लिए तत्काल राहत तो ला सकता है लेकिन इससे देश की दीर्घकालिक आर्थिक संप्रभुता पर खतरा बढ़ता जा रहा है. लगातार बढ़ते कर्ज और आर्थिक अनिश्चितता के बीच पाकिस्तान के लिए आत्मनिर्भरता की राह मुश्किल होती जा रही है.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।