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अभिनेत्री दीपिका पादुकोण हुईं एलएंडटी के चेयरमैन सुब्रह्मण्यन से नाराज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

मुंबई. दीपिका पादुकोण जो इन दिनों अपनी मां बनने के लाइमलाइट से दूर बेटी दुआ पादुकोण सिंह के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताती हुई नजर आ रही हैं. हालांकि सोशल मीडिया के जरिए वह फैंस के साथ अपने ख्यालों और राय को जरुर शेयर कर रही हैं. इसी के चलते हाल ही में इंस्टाग्राम स्टोरीज पर पोस्ट शेयर करते हुए दीपिका ने नाराजगी जाहिर की. दरअसल, अपने पोस्ट में उन्होंने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के अध्यक्ष एसएन सुब्रह्मण्यन द्वारा कर्मचारियों के वर्कलाइफ  बैलेंस के संबंध में हाल ही में किए गए एक कमेंट पर चिंता व्यक्त की, जिसमें कर्मचारियों के साथ हुई एक मीटिंग में सुब्रमण्यन ने सुझाव दिया कि कर्मचारियों को सफल होने के लिए सप्ताह में सातों दिन काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

इसे लेकर दीपिका ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी असहमति जताई और इस बयान को ‘चौंकाने वाला’ बताया. इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने वर्क लाइफ बैलेंस और मेंटल हेल्थ के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “ऐसे वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को इस तरह के बयान देते देखना चौंकाने वाला है. #मानसिकस्वास्थ्यमहत्वपूर्ण है.” अन्य पोस्ट में उन्होंने कैप्शन दिया, और उन्होंने ज्यादा खराब कर दिया. एक्ट्रेस का ये रिएक्शन तब आया है जब गुरुवार को बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो की चेयरपर्सन ने रविवार को 90 घंटे काम करने की वकालत की. कर्मचारियों से बातचीत के दौरान एलएंडटी प्रमुख ने कहा, “मुझे खेद है कि मैं रविवार को आपसे काम नहीं करवा पा रहा हूं. अगर मैं रविवार को आपसे काम करवा पाऊं तो मुझे ज्यादा खुशी होगी. आप घर पर बैठकर क्या करते हैं? आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक घूर सकते हैं?”

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।