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पाकिस्तान को बलूचिस्तान में मिला लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का खनिज भंडार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

क्वेटा. पाकिस्तान की खस्ता हालत से दुनिया अच्छे से वाकिफ है। वहां पर लोग खाने-खाने को मोहताज हो रखे हैं। शहबाज सरकार भी देश की स्थिती सुधारने के लिए कुछ नहीं कर रही है। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, उससे पाकिस्तान के दिन बदल सकते हैं। असल में पाकिस्तान को बलूचिस्तान में सोने-तांबे के विशाल भंडार मिले हैं। खबरों के मुताबिक पाकिस्तान की नेशनल रिसोर्सेज लिमिटेड (NRL) ने बलूचिस्तान के चगाई जिले में विशाल भंडार मिलने की पुष्टि की है। पाक मीडिया के मुताबिक पिछले 18 महीनों में कंपनी ने 500 वर्ग किमी में खोज किया था, जिसमें 16 संभावित माइनिंग साइटों की पहचान की गई। बता दें कि ये क्षेत्र पहले भी रेको डिक और सैनाक जैसी खदानों के लिए प्रसिद्ध रहा है।

$500 बिलियन से $1 ट्रिलियन मापी गई कीमत

बता दें कि रेको डिक खान विश्व की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। इस नई खोज के बाद कंपनी का मानना है कि यहां पर 5.9 अरब टन विशाल भंडार मिल है। वहीं इसका अनुमानित कीमत $500 बिलियन से $1 ट्रिलियन का लगाया जा रहा है। इसमें इतना सोना और तांबा भरा है कि पूरे 50 सालों तक इसे निकाला जा सकता है।बलूचिस्तान संसाधनों के मामले में कितना ज्यादा समृद्ध है उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि नेशनल रिसोर्सेज लिमिटेड (NRL) कि रिपोर्ट के मुताबिक हर साल खदानों में से 15,800 टन तांबा, 1.47 टन सोना और 2.76 टन चांदी निकाला जा सकता है। इसके मुल्य की बत करें तो वो 50 से 100 अरब की बीच हो सकती है।

संसाधनों के बाद भी विकास में पिछड़ा बलूचिस्तान

संसाधनों के मामले में बलूचिस्तान कितना ज्यादा समृद्ध है, इस बात का अंदाजा आपको हो गया होगा। लेकिन इसके बाद भी वहां पर आज भी लोग विकास के लिए तरस रहे हैं। खनिजों की भरमार के बावजूद, बलूचिस्तान, पाकिस्तान के सबसे गरीब और अलगाव वाले हिस्सों में गिना जाता है। असल में वहां की शहबाज सरकार ने बलूच राष्ट्रवाद और अलगाववादी आंदोलनों ने लोगों को विकास खनिजों के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है। इसके अलावा इलाके में स्वास्थ्य, शिक्षा और जल जैसी सुविधाएं न के बराबर हैं।

साभार : इंडिया न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।