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आलिया भट्ट की पूर्व मैनेजर उनके साथ ही धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. बॉलीवुड में लगभग हर एक सेलिब्रिटी का पर्सनल मैनेजर है. जो उनकी हर एक चीज को संभालते हैं जिनमें उनका बैंक अकाउंट भी शामिल होता है. कई बार सिलेब्रिटीज का अपने मैनेजर पर भरोसा  मुश्किल में डाल देता है. हाल ही में आलिया भट्ट के साथ उनके एक्स मैनेजर ने धोखाधड़ी की है. जिसके आरोप में उनकी  एक्स मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि उनकी एक्स मैनेजर ने बड़ी रकम का गबन किया और  आलिया भट्ट की प्रॉडक्शन कंपनी में हेरा फेरी करके उन्हें नुकसान पहुंचाया है. एक्स मैनेजर की गिरफ्तारी के बाद अब सवाल है कि इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों में दोषी पाए जाने पर सजा कितनी हो सकती है? चलिए आपको बताते हैं.

कितनी हो सकती है धोखाधड़ी को लेकर सजा?

आलिया भट्ट की मैनेजर ने उनके साथ तकरीबन 77 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है. इस रकम को गबन कर के उन्होंने आलिया की प्रोडक्शन कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक्स मैनेजर को गिरफ्तार किया है. इस तरह के मामलों में जहां किसी के साथ धोखाधड़ी करके उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है. इसे लेकर कानून काफी सख्त रुख अपनाता है. आपको बता दें ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत अगर आरोपी दोषी पाया जाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. हालांकि  कोर्ट केस के सभी पहलुओं की जांच करने के बाद ही सजा तय करता है. बता दें इस मामले में फिलहाल जांच जारी है.

इन बॉलीवुड स्टार्स के साथ भी हो चुकी है धोखाधड़ी

आलिया भट्ट अकेली नहीं हैं जिनके साथ उनके करीबी या भरोसेमंद लोगों ने धोखाधड़ी की हो. इससे पहले सुष्मिता सेन के साथ भी उनकी मैनेजर ने ऐसे ही गड़बड़ी की थी. श्रद्धा कपूर के साथ एक इवेंट कंपनी ने पेमेंट को लेकर ठगी की थी. तो वहीं राजकुमार राव की पत्नी पत्रलेखा के नाम पर किसी ने फर्जी मेल बनाकर पैसे ऐंठने की कोशिश की थी. यहां तक कि अमिताभ बच्चन को भी फेक कंपनियों और ब्रांड्स के नाम पर कई बार निशाना बनाया गया है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।