लोड हो रहा है...

सियाचिन में हिमस्खलन से दो अग्निवीर और एक जवान का बलिदान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लेह. लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में मंगलवार को बड़ा हादसा हुआ है. आपको बता दें कि यह हिमस्खलन इतना भीषण था की सेना के तीन जवानों का बलिदान हो गया. अधिकारियों ने बताया कि रविवार को 12,000 फीट ऊंचे सियाचिन बेस कैंप क्षेत्र में भीषण हिमस्खलन हुआ, जिसमें दो अग्निवीरों सहित तीन सैनिक शहीद हो गए. जानकारी देते हुए अधिकारियों ने शहीद हुए सैनिकों की पहचान कर ली है.  दरअसल इन जवानों की पहचान एम कुमार, अग्निवीर डी राकेश और अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी के रूप में की गई है.

घटना के बाद सेना की रेस्क्यू टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और शहीद जवानों के शव निकालने के साथ-साथ इलाके को सुरक्षित करने का काम शुरू कर दिया. इस हादसे से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है.

हाल ही इस घटना ने साल 2021 की याद दिला दी है. आपको बता दें कि साल 2021 में सब-सेक्टर हनीफ में हिमस्खलन हुआ था. इस घटना में 2 जवान शहीद हो गए थे. दरअसल, उस समय भी जवानों को सुरक्षित निकालने में लगभग 6 घंटे से अधिक का समय लगा था. इतना ही नहीं साल 2019 में भी इसी तरह की भीषण हिमोक्लिन हुआ था. यह भीषण हिमोक्लिन 18000 फीट की ऊंचाई पर हुआ था, जिसमें 4 जवान फंस गए थे. हालांकि कड़ी मेहनत के बाद तीन जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि 1 जवान शहीद हो गया था.

3 फरवरी 2016 को 19,600 फीट की ऊंचाई पर एक बड़ा हिमस्खलन हुआ था. इसमें भारतीय सेना के 10 जवान बर्फ के नीचे दब गए थे. इनमें लांस नायक हनमनथप्पा कोप्पड़ भी शामिल थे, जिन्हें जिंदा निकाला गया था. लेकिन गंभीर हालत और शरीर के कई अंगों के काम करना बंद कर देने की वजह से बाद में उनका निधन हो गया था.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।