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सोनी सब का ‘गणेश कार्तिकेय’ एक दिव्य मील के पत्थर के करीब, रिद्धि और सिद्धि के साथ होने वाला है भगवान गणेश का शुभ विवाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, दिसंबर 2025 : सोनी सब की पौराणिक गाथा, ‘गाथा शिव परिवार की – गणेश कार्तिकेय’, शिव परिवार – देवताओं के पहले परिवार की कम-ज्ञात कहानियों को जीवंत करती है। यह शो आध्यात्मिक भव्यता को कोमल पारिवारिक भावनाओं के साथ खूबसूरती से मिश्रित करता है, यह दिखाता है कि भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय का दिव्य परिवार प्रेम, कर्तव्य और संघर्ष को कैसे संभालता है।

आने वाले एपिसोड में दिव्य कहानी भगवान गणेश के भाग्य के एक महत्वपूर्ण मोड़, उनके विवाह की ओर बढ़ रही है। जब तुलसी (गीत जैन) भगवान गणेश से विवाह करने की इच्छा व्यक्त करती हैं, तो वह विनम्रतापूर्वक उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं। उनके मना करने से आहत होकर, तुलसी उन्हें शाप देती हैं, यह घोषणा करते हुए कि भगवान गणेश दो बार विवाह करेंगे और दो पत्नियों से बंधे रहेंगे। यह शाप ही वह चिंगारी बन जाता है जो एक गहरे ब्रह्मांडीय सत्य को प्रकट करता है: यह वह समय है जब भगवान गणेश का भगवान ब्रह्मा (आरके दत्ता) की पुत्रियों, रिद्धि (नारायणी वर्णे) और सिद्धि (श्रेया पटेल) के साथ पवित्र मिलन होगा। जैसे ही पार्वती इस दिव्य बदलाव को महसूस करती हैं, वह भगवान गणेश से दो उज्ज्वल प्रकाश निकलते हुए देखती हैं, जो इस बात का संकेत है कि उनकी नियत दुल्हनें उनके जीवन में प्रवेश कर रही हैं। यह शक्तिशाली मोड़ भगवान गणेश की यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक के लिए मंच तैयार करता है: रिद्धि और सिद्धि के साथ उनका शुभ विवाह, जो उनके दिव्य मार्ग में समृद्धि और ज्ञान लाएंगे।

देवी पार्वती की भूमिका निभा रहीं श्रेनु पारिख ने कहा , “पार्वती के रूप में, यह ट्रैक मेरे लिए बहुत खास रहने वाला है क्योंकि यह एक माँ के उस आनंद को दर्शाएगा जब उसे यह अहसास होता है कि उसका बेटा जीवन के एक नए चरण में कदम रख रहा है। भगवान गणेश का रिद्धि और सिद्धि के साथ विवाह केवल एक दिव्य घटना नहीं है, बल्कि पूरे शिव परिवार के लिए एक सुंदर, भावनात्मक क्षण भी है।”

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।