लोड हो रहा है...

टेनिस स्टार राधिका को उसके ही पिता ने गोली मार की हत्या

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

चंडीगढ़. गुरुग्राम में एक टेनिस प्‍लेयर की गोली मारकर हत्‍या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. सुशांत लोक में रहने वाली टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की गोली मारकर हत्‍या दी गई. राधिका को गोली मारने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके पिता ही हैं. टेनिस खिलाड़ी को घर पर ही उनके पिता ने गोली मार दी. पुलिस ने आरोपी पिता दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया है. उन्‍होंने बताया कि राधिका यादव टेनिस एकेडमी चलाती थी, जिसके कारण उसका पिता दीपक यादव नाराज था.  राधिका यादव की मौत से जुड़ी 5 बड़ी बातें.

  1. राधिका यादव की हत्‍या गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे हुई. राधिका अपने परिवार के साथ गुरुग्राम के सुशांत लोक-2 स्थित E-157 में रहती थीं.
  2. राधिका के पिता ने अपनी बेटी पर एक के बाद एक पांच गोलियां चलाई, जिनमें से तीन गोलियां राधिका को लगी.पुलिस ने आरोपी पिता दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया है. उन्‍होंने बताया कि राधिका यादव टेनिस एकेडमी चलाती थी, जिसके कारण उसका पिता दीपक यादव नाराज था.
  3. राधिका यादव को गोली लगने के बाद गंभीर हालत में तुरंत अस्‍पताल ले जाया गया, जहां पर डॉक्‍टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया.
  4. राधिका स्‍टेट लेवल की टेनिस खिलाड़ी थी और उन्‍होंने अपने टेनिस से कई बार अपने पिता और परिवार का नाम रोशन किया था. कई प्रतियोगिताओं मेंराधिका ने कई मेडल अपने नाम किए थे. अंतरराष्‍ट्रीय टेनिस महासंघ में युगल टेनिस खिलाड़ी के रूप में राधिका की 113वीं रैंकिंग थी.
  5. पुलिस ने मौके से आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही हत्‍या में इस्‍तेमाल रिवाल्वर को भी बरामद कर लिया गया है.अब पुलिस आरोपी पिता से पूछताछ में जुटी है.

साभार : एनडीटीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

- Advertisement -

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।