शुक्रवार, जनवरी 16 2026 | 08:07:20 AM
Breaking News
Home / राज्य / महाराष्ट्र / ब्रिटिश गवर्नर कर्नाक के नाम पर बना पुल अब सिंदूर ब्रिज के नाम से जाना जायेगा

ब्रिटिश गवर्नर कर्नाक के नाम पर बना पुल अब सिंदूर ब्रिज के नाम से जाना जायेगा

Follow us on:

मुंबई. मुंबईवासियों का गुरुवार को एक लंबा इंतजार पूरा हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कर्नाक ब्रिज का शुभारंभ किया और इसी के साथ मुंबई के लोगों के लिए इस ब्रिज को नया नाम दे दिया। सीएम फडणवीस ने कहा कि कर्नाक ब्रिज अब सिंदूर ब्रिज कहलाएगा। उन्होंने कहा कि यह ब्रिज 150 वर्षों से कर्णक ब्रिज के नाम से जाना जाता रहा है। अब इसका नाम सिंदूर ब्रिज होगा। फडणवीस ने कहा कि कर्णक ब्रिज का नाम बदलकर सिंदूर रखने का उद्देश्य कर्णक के काले इतिहास के निशान मिटाना है, जो एक ब्रिटिश गवर्नर था जिसने भारतीयों को धोखा दिया और उन पर अत्याचार किए।

342 मीटर हैं पुल की लंबाई

फडणवीस ने मुंबई के मस्जिद बंदर रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित और पी. डी’ मेलो रोड से जुड़े सिंदूर (पूर्व में कर्णक) रेलवे फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर, कर्नाक ब्रिज का नाम बदला गया है। उन्होंने कहा कि इतिहास के काले मामलों का अंत होना चाहिए और उनके निशान मिट जाने चाहिए। पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया। भारत ने दिखाया कि वह पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी शिविरों को नष्ट कर सकता है। मुझे खुशी है कि इस सेना के अद्वितीय प्रदर्शन के कारण महानगरपालिका ने इस पुल का नाम सिंदूर रखा है। इस पुल की कुल लंबाई 342 मीटर है और रेलवे लाइन 70 मीटर है, इसलिए यह पुल निश्चित रूप से मुंबई में यातायात के लिए बहुत उपयोगी होगा।

मुंबईकरों को बड़ी राहत

मुंबई नगर निगम द्वारा ऐतिहासिक पुराने कर्नाक ब्रिज को सिंदूर ब्रिज के नामसे मुंबई के लोगों को समर्पित कर दिया। गुरुवार दोपहर 3:00 बजे से यातायात के लिए खोल दिया गया। सिंदूर ब्रिज दक्षिण मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मस्जिद बंदर और मोहम्मद अली मार्ग क्षेत्रों में यातायात के लिए महत्वपूर्ण है। बृहन्मुंबई नगर निगम ने मस्जिद बंदर क्षेत्र में पूर्व और पश्चिम क्षेत्रों को जोड़ने वाले मौजूदा मार्ग को बनाए रखने के लिए इस ब्रिज का पुनर्निर्माण किया है। यह ब्रिज पी. डी’ मेलो रोड पर बंदरगाह क्षेत्र और मुंबई शहर के दक्षिण में क्रॉफर्ड मार्केट, कालबादेवी, धोबी तालाब जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों को रेलवे के माध्यम से पूर्व-पश्चिम से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुल के पुनर्निर्माण से पूर्व-पश्चिम यातायात को सुविधा मिलेगी। जो लगभग 10 सालों से बाधित है। पुल के चालू होने पर, पी. डी’ मेलो रोड पर, विशेष रूप से वालचंद हीराचंद रोड और शहीद भगत सिंह रोड के चौराहे पर, यातायात की भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। पुल के पुनर्निर्माण से यूसुफ मेहर अली रोड, मोहम्मद अली रोड, सरदार वल्लभभाई पटेल रोड और काजी सैयद रोड पर यातायात सुगम हो जाएगा।

साभार : नवभारत टाइम्स

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

शिवाजी पार्क में ‘ठाकरे गर्जना’: 20 साल बाद एक मंच पर आए उद्धव और राज, BMC चुनावों के लिए फूंका बिगुल

मुंबई. ऐतिहासिक शिवाजी पार्क (शिवतीर्थ) में आज एक नया इतिहास रचा गया। पिछले दो दशकों …