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हर घर तिरंगा फिल्म महोत्सव के अंतर्गत देश भर में स्वतंत्रता और एकता की सिनेमाई कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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हर घर तिरंगा – देशभक्ति फिल्म महोत्सव आज भरपूर उत्साह के साथ शुरू हुआ, जो भारत की स्वतंत्रता के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी सिनेमाई श्रद्धांजलि की शुरुआत का प्रतीक है। 11-13 अगस्त, 2025 तक चलने वाले इस महोत्सव का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) द्वारा किया जा रहा है।

यह महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक हर घर तिरंगा अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रत्येक नागरिक के भावनात्मक जुड़ाव को गहरा करना और एकता एवं देशभक्ति की नई भावना का संचार करना है। सावधानी के साथ तैयार की गई फिल्मों के माध्यम से, इस महोत्सव का उद्देश्य दर्शकों को भारत की स्वतंत्रता के सफर की याद दिलाना, अनगिनत वीरों के बलिदान का उत्सव मनाना और राष्ट्र की पहचान को आकार देने वाली कहानियों को प्रदर्शित करना है।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने कहा कि सिनेमा में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को अमर बनाने और पीढ़ियों को प्रेरित करने की शक्ति है। मंत्री ने आगे कहा कि हर घर तिरंगा – देशभक्ति फिल्म महोत्सव केवल सिनेमा का उत्सव ही नहीं है, बल्कि उस यात्रा की याद दिलाता है जिसने हमें स्वतंत्रता दिलाई।

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मुंबई में इस अवसर पर बोलते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव श्री संजय जाजू ने कहा कि हर घर तिरंगा- देशभक्ति फिल्म महोत्सव का उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से भारत के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करना है। श्री जाजू ने आगे कहा कि सिनेमा एक दृश्य माध्यम होने के कारण दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और इसलिए, इस महोत्सव का उद्देश्य सभी भारतीयों में देशभक्ति की भावना पैदा करना है।

अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने भी मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस पहल का हिस्सा बनकर वह सम्मानित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, “ये फ़िल्में हमें हमारे लोगों के लचीलेपन और साहस की याद दिलाती हैं और यह जरूरी है कि हम इन कहानियों को साझा करते रहें।”

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दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए

चार शहरों में भव्य उद्घाटन

  • नई दिल्ली: इस महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन एनएफडीसी-सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र श्री कपिल मिश्रा ने किया। उनके साथ वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिनमें श्री प्रभात, अपर सचिव (सूचना एवं प्रसारण); श्री भूपेंद्र कैंथोला, प्रधान महानिदेशक (डीपीडी); और श्री धीरेंद्र ओझा, प्रधान महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) शामिल थे।
  • मुंबई: इस महोत्सव का उद्घाटन एनएफडीसी-राष्ट्रीय भारतीय सिनेमा संग्रहालय (एनएमआईसी) परिसर में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू और प्रशंसित अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर की उपस्थिति में हुआ, जिनकी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। वरिष्ठ अधिकारियों, फिल्म निर्माताओं और सिनेमा प्रेमियों ने इसमें भाग लिया, जिससे तीन दिनों तक चलने वाले प्रेरणादायक फिल्म प्रदर्शनों का माहौल तैयार हुआ।
  • चेन्नई: टैगोर फिल्म सेंटर ने एक उद्घाटन समारोह आयोजित किया, जिसमें निर्देशक वसंत ने सिनेमा के माध्यम से देशभक्ति पर अपने गहन विचारों के लिए; कोरियोग्राफर कला मास्टर ने राष्ट्रीय गौरव में कला की भूमिका को सामने लाने के लिए; तमिल चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट श्री चोझा नाचियार ने अपने समर्थन और प्रोत्साहन के लिए; अभिनेत्री नमिता ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति और देशभक्तिपूर्ण विचारों के लिए; तमिलनाडु संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एवीएस शिवकुमार ने संस्कृति, परंपरा और युवा प्रतिभा को जोड़ने के लिए; और श्री वीरा ने अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
  • पुणे: हालांकि पुणे में फिल्मों की स्क्रीनिंग कुछ ही देर बाद शुरू हो गई, लेकिन एनएफडीसी-नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (एनएफएआई) के दर्शकों ने दिल्ली, मुंबई और चेन्नई से उद्घाटन समारोहों का सीधा प्रसारण देखा, जिससे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी में एकता और साझा उत्सव की भावना का संचार हुआ।

विविध और प्रेरक फिल्मों की सूची

इस विविध फिल्म सूची में निम्नलिखित महान देशभक्ति फिल्में शामिल हैं:

  • शहीद (1965) – शहीद भगत सिंह और उनके सर्वोच्च बलिदान की प्रेरक कहानी।
  • स्वातंत्र्य वीर सावरकर (2024) – स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन और विचारधारा का वृत्तांत।
  • उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक (2019) – 2016 में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का आधुनिक पुनर्कथन।
  • आरआरआर (2022) – स्वतंत्रता सेनानियों के काल्पनिक वृत्तांतों से प्रेरित एक महाकाव्य एक्शन ड्रामा।
  • तानाजी (2020) – मराठा योद्धा तान्हाजी मालुसरे की वीरतापूर्ण कहानी।

अन्य उल्लेखनीय स्क्रीनिंग में शामिल हैं:

  • मेजर (2022) – 26/11 के मुंबई हमलों में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की बहादुरी को श्रद्धांजलि।
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस – दूरदर्शी राष्ट्रवादी नेता की विरासत को दर्शाती एक लघु वृत्तचित्र।
  • वीरपांडिया कट्टाबोम्मन (1959) – दक्षिण भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी पर आधारित एक तमिल क्लासिक।
  • क्रांति (1981) – औपनिवेशिक शासन के खिलाफ विद्रोह की एक भव्य कहानी।
  • हकीकत (1964) – 1962 के भारत-चीन संघर्ष से प्रेरित एक मार्मिक युद्ध नाटक।
  • पराशक्ति (1952) – मजबूत सामाजिक और राष्ट्रवादी विषयों वाली एक ऐतिहासिक तमिल फिल्म।
  • सात हिंदुस्तानी (1969) – गोवा की मुक्ति के लिए लड़ रहे सात भारतीयों की कहानी।

इसके अलावा, यह महोत्सव शैक्षिक वृत्तचित्र भी प्रस्तुत करता है जो ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान करते हैं और दर्शकों की भागीदारी को गहरा करते हैं:

  • ऑवर फ्लैग- तिरंगे के प्रतीकवाद और इतिहास की खोज।
  • लोकमान्य तिलक – बाल गंगाधर तिलक के जीवन और राजनीतिक जागरण का वृत्तांत।
  • तिलक – तिलक के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का एक अंतरंग चित्रण।
  • शहादत – भारत की स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान के कार्यों पर प्रकाश।

एनएफएआई द्वारा पुनर्स्थापित क्लासिक्स (शास्त्रीय फिल्में) – अतीत को जीवंत करना

इस महोत्सव में चार ऐतिहासिक फिल्में – क्रांति (1981), हकीकत (1964), सात हिंदुस्तानी (1969) और शहीद (1965) – भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफएआई) के अथक संरक्षण प्रयासों के कारण उनके डिजिटल रूप से पुनर्स्थापित संस्करणों में प्रस्तुत की गई हैं।

  • क्रांति (1981) – 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ भारत के संघर्ष की एक व्यापक कहानी, जिसमें मनोज कुमार, दिलीप कुमार और हेमा मालिनी जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है।
  • हकीकत (1964) – चेतन आनंद द्वारा निर्देशित, यह युद्ध ड्रामा 1962 के भारत-चीन संघर्ष की भावनात्मक और रणनीतिक चुनौतियों को दर्शाता है।
  • सात हिंदुस्तानी (1969) – विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए सात भारतीयों की एक जोशीली कहानी, जो गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के लिए एकजुट होते हैं – अमिताभ बच्चन की पहली फ़िल्म के रूप में उल्लेखनीय।
  • शहीद (1965) – मनोज कुमार द्वारा भगत सिंह के क्रांतिकारी संघर्ष और बलिदान का सशक्त चित्रण।

पुनर्स्थापना में एनएफएआई की भूमिका:

एनएफडीसी का एक प्रभाग, भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार, फिल्म संरक्षण और पुनर्स्थापना में अग्रणी रहा है और यह सुनिश्चित करता है कि भारत की सिनेमाई विरासत समय के साथ लुप्त न हो। उन्नत डिजिटलीकरण तकनीकों, रंग-श्रेणीकरण और ध्वनि संवर्धन के माध्यम से, एनएफएआई सेल्युलाइड प्रिंटों को लगभग मूल गुणवत्ता में पुनर्स्थापित करता है, जिससे नए दर्शक इन क्लासिक फिल्मों का अनुभव उसी रूप में कर पाते हैं जैसा उन्हें देखा जाना चाहिए था। हर घर तिरंगा – देशभक्ति फिल्म महोत्सव में इन पुनर्स्थापित संस्करणों को शामिल करना फिल्म निर्माताओं के प्रति एक श्रद्धांजलि और भारत की फिल्म विरासत की रक्षा के लिए एनएफएआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि दोनों है।

महोत्सव का संपूर्ण कार्यक्रम – सभी शहर (11-13 अगस्त, 2025)

नीचे पूरे हर घर तिरंगा – देशभक्ति फिल्म महोत्सव कार्यक्रम की शहरवार, दिन-प्रतिदिन की तालिका दी गई है। जहां एक ही शहर में स्क्रीनिंग ओवरलैप होती हैं, वहां एक दूसरा/माध्यमिक दर्शाया गया है।

नई दिल्ली — एनएफडीसी, सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम

दिनांकस्थान/स्क्रीनसमयकार्यक्रम
11 अगस्त, 2025 (उद्घाटन का दिन)मेन हॉल (ऑडी-2)11:00 एएम – 11:30 एएमउद्घाटन समारोह
 मेन हॉल (ऑडी-2)12:30 पीएम – 3:30 पीएमशहीद
 मेन हॉल (ऑडी-2)4:00 पीएम – 7:00 पीएमस्वातंत्र्य वीर सावरकर
12 अगस्त, 2025 (दूसरा दिन)मेन हॉल (ऑडी-2)11:00 एएम – 11:20 एएमवृत्तचित्र – ऑवर फ्लैग
 मेन हॉल (ऑडी-2)11:20 एएम – 2:00 पीएमउरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
 मेन हॉल (ऑडी-2)2:30 पीएम – 2:40 पीएमनेताजी सुभाष चंद्र बोस (लघु वृत्तचित्र)
 मेन हॉल (ऑडी-2)2:40 पीएम – 5:10 पीएममेजर
 स्क्रीनिंग रूम (सेकेंडरी)2:30 पीएम – 5:40 पीएमक्रांति (समानांतर स्क्रीनिंग)
 मेन हॉल (ऑडी-2)5:30 पीएम – 6:00 पीएमवृत्तचित्र – शहादत
13 अगस्त, 2025 (समापन का दिन)मेन हॉल (ऑडी-2)11:00 एएम – 1:15 पीएमतानाजी
 मेन हॉल (ऑडी-2)2:00 पीएम – 5:30 पीएमआरआरआर
 मेन हॉल (ऑडी-2)6:00 पीएम – 8:30 पीएमसात हिंदुस्तानी

मुंबई – एनएफडीसी / एनएमआईसी कॉम्प्लेक्स, पेडर रोड

दिनांकस्थान/स्क्रीनसमयकार्यक्रम
11 अगस्त, 2025 (उद्घाटन का दिन)मेन हॉल11:00 एएम – 11:30 एएमउद्घाटन समारोह
 मेन हॉल11:30 एएम – 12:00 पीएमस्थानीय उद्घाटन समारोह (श्रिया पिलगांवकर)
 मेन हॉल12:00 पीएम – 12:30 पीएमवृत्तचित्र – लोकमान्य तिलक
 मेन हॉल12:30 पीएम – 3:30 पीएमशहीद
 मेन हॉल4:00 पीएम – 7:00 पीएमस्वातंत्र्य वीर सावरकर
12 अगस्त, 2025 (दूसरा दिन)मेन हॉल11:00 एएम – 11:20 एएमवृत्तचित्र – ऑवर फ्लैग
 मेन हॉल11:20 एएम – 2:00 पीएमउरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
 स्क्रीनिंग रूम (सेकेंडरी)2:30 पीएम – 2:40 पीएमनेताजी सुभाष चंद्र बोस (लघु वृत्तचित्र)
 मेन हॉल2:40 पीएम – 5:10 पीएममेजर
 मेन हॉल5:30 पीएम – 6:00 पीएमवृत्तचित्र – शहादत
 स्क्रीनिंग रूम (सेकेंडरी)6:00 पीएम – 9:00 पीएमक्रांति (समानांतर स्क्रीनिंग)
13 अगस्त, 2025 (समापन का दिन)मेन हॉल11:00 एएम – 1:15 पीएमतानाजी
 मेन हॉल2:00 पीएम – 5:30 पीएमआरआरआर
 मेन हॉल6:00 पीएम – 8:30 पीएमसात हिंदुस्तानी

पुणे — एनएफडीसी / एनएफएआई (लॉ कॉलेज रोड)

दिनांकस्थान/स्क्रीनसमयकार्यक्रम
11 अगस्त, 2025 (उद्घाटन का दिन)एनएफएआई थिएटर (मेन)11:00 एएम – 11:30 एएमउद्घाटन समारोह
 एनएफएआई थिएटर (मेन)11:30 एएम – 2:00 पीएमशहीद
 एनएफएआई थिएटर (मेन)4:00 पीएम – 7:00 पीएमस्वातंत्र्य वीर सावरकर
12 अगस्त, 2025 (दूसरा दिन)एनएफएआई थिएटर (मेन)11:00 एएम – 11:20 एएमवृत्तचित्र – ऑवर फ्लैग
 एनएफएआई थिएटर (मेन)11:20 एएम – 2:00 पीएमउरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
 एनएफएआई थिएटर (मेन)3:00 पीएम – 3:20 पीएमनेताजी सुभाष चंद्र बोस (लघु वृत्तचित्र)
 एनएफएआई थिएटर (मेन)3:30 पीएम – 6:30 पीएमहकीकत
 एनएफएआई थिएटर (मेन)6:30 पीएम – 7:00 पीएमवृत्तचित्र – शहादत
13 अगस्त, 2025 (समापन का दिन)एनएफएआई थिएटर (मेन)11:00 एएम – 1:15 पीएमतानाजी
 एनएफएआई थिएटर (मेन)2:00 पीएम – 2:30 पीएमवृत्तचित्र-तिलक
 एनएफएआई थिएटर (मेन)2:30 पीएम – 5:40 पीएमक्रांति
 एनएफएआई थिएटर (मेन)6:00 पीएम – 8:30 पीएमसात हिंदुस्तानी

चेन्नई — टैगोर फिल्म सेंटर

दिनांकस्थान/स्क्रीनसमयकार्यक्रम
11 अगस्त, 2025 (उद्घाटन का दिन)टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)11:00 एएम – 11:30 एएमउद्घाटन समारोह
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)12:30 पीएम – 3:30 पीएमशहीद
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)4:00 पीएम – 7:00 पीएमस्वातंत्र्य वीर सावरकर
12 अगस्त, 2025 (दूसरा दिन)टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)11:00 एएम – 11:20 एएमवृत्तचित्र – ऑवर फ्लैग
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)11:20 एएम – 2:00 पीएमउरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)3:00 पीएम – 3:20 पीएमनेताजी सुभाष चंद्र बोस (लघु वृत्तचित्र)
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)3:30 पीएम – 6:30 पीएमवीरपांडिया कट्टाबोम्मन
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)6:30 पीएम – 7:00 पीएमवृत्तचित्र – शहादत
13 अगस्त, 2025 (समापन का दिन)टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)11:00 एएम – 1:15 पीएमतानाजी
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)2:00 पीएम – 2:30 पीएमवृत्तचित्र-तिलक
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)2:30 पीएम – 5:40 पीएमपराशक्ति
 टैगोर फिल्म सेंटर (मेन)6:00 पीएम – 8:30 पीएमसात हिंदुस्तानी

एनएफडीसी की भूमिका और प्रतिबद्धता

भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने दशकों से भारतीय सिनेमा के विकास और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार की प्रमुख फिल्म एजेंसी के रूप में, एनएफडीसी न केवल गुणवत्तापूर्ण फिल्मों का निर्माण और प्रचार करता है, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के माध्यम से राष्ट्र की सिनेमाई विरासत की रक्षा भी करता है।

हर घर तिरंगा – देशभक्ति फिल्म महोत्सव के साथ, एनएफडीसी सिनेमा के माध्यम को एक एकीकृत शक्ति के रूप में उपयोग करता है—पीढ़ियों, भाषाओं और क्षेत्रों के बीच सेतु का काम करता है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नागरिकों और राष्ट्रीय ध्वज के बीच एक व्यक्तिगत जुड़ाव को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो उत्सव के इस कार्य को भारत के मूल्यों और इतिहास के साथ एक गहन जुड़ाव में बदल देता है।

एनएफडीसी का प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि देशभक्ति की कहानियां – चाहे वे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हों या कल्पना के माध्यम से पुनर्कल्पित हों – दर्शकों के साथ गूंजती रहें और अगली पीढ़ी को स्वतंत्रता और एकता के आदर्शों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।