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फ्रांस की सड़कों पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ हुआ हिंसक प्रदर्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पेरिस. नेपाल में इन दिनों भयानक बवाल देखने को मिल रहा है. जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर हंगामा किया, जिस कारण सरकार गिर गई. केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा है. नेपाल में हुए प्रदर्शन के बाद एक और देश में बवाल मचा हुआ है. इस देश का नाम फ्रांस है. फ्रांस इन दिनों सड़कों पर अराजकता और संसद में अस्थिरता दोनों से जूझ रहा है. बुधवार सुबह राजधानी पेरिस और कई बड़े शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण टकराव हुआ. ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ नाम से शुरू हुए इस अभियान ने पूरे देश में परिवहन व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है. पेरिस में अकेले 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया.

नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह कचरे के डिब्बे और बैरिकेड्स लगाकर सड़कें जाम कर दीं. बोरदॉ और मार्सिले जैसे शहरों में भीड़ ने चौराहों को घेर लिया. पुलिस पर फ्लेयर्स और बोतलें फेंकी गईं, जबकि राजधानी के रेलवे हब गारे दू नॉर स्टेनश पर भी प्रदर्शनकारियों ने धावा बोला. पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए अधिकतर लोग सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि, अधिकारियों का अनुमान है कि जैसे-जैसे दिन बढ़ेगा, भीड़ और भड़क सकती है. यह हिंसक आंदोलन ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने महज 24 घंटे पहले ही देश के नए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की नियुक्ति की है.

लेकोर्नू ने संसद में भरोसा खो चुके पूर्व पीएम फ्रांस्वा बायरो की जगह ली है. बायरो को सोमवार रात अपने ही आत्म-विश्वास मत में हारने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था. बायरो ने देश का कर्ज कम करने के लिए करीब £35 अरब (लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये) की कटौती योजना पेश की थी, लेकिन यह सख्त कदम जनता को रास नहीं आया और उनकी सरकार गिर गई. अब पूरे फ्रांस में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार ने 80,000 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए हैं ताकि इस आंदोलन को काबू में किया जा सके.

लूटपाट की तैयारी!

प्रदर्शनकारी न सिर्फ रेल और सड़क यातायात रोक रहे हैं बल्कि तेल डिपो, सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों को भी निशाना बना रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ समूहों ने तो लोगों से दुकानों में लूटपाट की अपील तक कर डाली है. यह नया आंदोलन फ्रांस के कुख्यात ‘यलो वेस्ट्स’ आंदोलन की याद दिला रहा है, जिसने कुछ साल पहले मैक्रों को अपनी नीतियों में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया था.

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साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।