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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर आत्मघाती हमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पेशावर. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर आत्मघाती हमला हुआ है. हमला अभी भी जारी है. हमलावरों और पाकिस्तानी सेना के बीच मुठभेड़ जारी है. अब तक 2 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं. हमले के पीछे टीटीपी के होने की संभावना है. वीडियो में हमलावर का कहना है कि हमने काबुल पर कल रात हुए हमले का बदला लिया है. हमले के समय का वीडियो भी हमलावरों ने जारी किया है. इसमें चारों तरफ आग लगी है और गोलियां चलने की आवाजें आ रही हैं. साथ ही हमलावर हमले के कारण भी बता रहा है. आपको बता दें कि पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर काबूल के अंदर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP के ठिकानों को निशाना बनाकर कल रात हवाई हमला किया था. यह हमला उस समय हुआ, जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री भारत में मौजूद हैं.

शरीफ ने दी थी चेतावनी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से कहा था कि उसे पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के बीच में से किसी एक को चुनना होगा. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान की धरती से जारी सीमा पार हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा.

पाकिस्तान को पड़ सकता है महंगा

2021 में जबसे तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता में वापसी की है, पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान यानी TTP से जुड़ी हिंसा में तेजी आई है. जवाब में, इस्लामाबाद ने भी आतंकवादी ठिकानों पर अफगानिस्तान के अंदर सीमा पार हमले किए हैं, इस बार तो उसने अफगानिस्तान की राजधानी काबूल में हवाई हमला करके तालिबान को सबसे बड़ी चुनौती दे डाली है. पाकिस्तान ने अफगान से होने वाले व्यापार पर भी सख्त नियंत्रण लगाया है, और बिना डॉक्यूमेंट वाले अफगान नागरिकों की वापस भेजना तेज कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 12 लाख अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान ने पहले ही बाहर निकाल दिया है. ऐसे में अफगानिस्तान की सीमा में हमला करना पाकिस्तान को अब भारी पड़ सकता है. कारण अफगानिस्तान न तो रूस से हारा और न अमेरिका से. फिर पाकिस्तान तो इनके सामने कोई हैसियत ही नहीं रखता. हालांकि, अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर हमला किसने किया है.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।